भारत-उत्तर मैसेडोनिया साझेदारी में व्यापार, तकनीक और स्वास्थ्य को नई गति

भारत-उत्तर मैसेडोनिया साझेदारी में व्यापार, तकनीक और स्वास्थ्य को नई गति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की 21-22 जुलाई 2026 की उत्तर मैसेडोनिया यात्रा के दौरान भारत और उत्तर मैसेडोनिया ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, प्रतिभा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। यह 1995 में राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति की उत्तर मैसेडोनिया की पहली द्विपक्षीय यात्रा रही, इसलिए इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।

व्यापार और निवेश पर फोकस

दोनों देशों के बीच 2025 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 133 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। बातचीत में इस आंकड़े को दोगुना करने की दिशा में काम करने पर सहमति बनी। इसके लिए व्यापारिक संपर्क बढ़ाने, निजी क्षेत्र की भागीदारी मजबूत करने और नए आर्थिक अवसरों की पहचान पर जोर दिया गया।भारत और उत्तर मैसेडोनिया ने यह भी माना कि व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए प्रत्यक्ष संपर्क और व्यावसायिक संवाद जरूरी हैं। इसी उद्देश्य से यात्रा के दौरान भारत-उत्तर मैसेडोनिया बिजनेस फोरम भी आयोजित किया गया, ताकि दोनों देशों के उद्यमियों और कंपनियों के बीच सीधा संवाद स्थापित हो सके।

तकनीक, पर्यटन और प्रतिभा सहयोग की दिशा

बातचीत में “तीन टी” यानी व्यापार, प्रौद्योगिकी और पर्यटन के साथ-साथ प्रतिभा को भी सहयोग के प्रमुख आधार के रूप में देखा गया। दोनों पक्षों ने सूचना प्रौद्योगिकी, आईटी-समर्थित सेवाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, जैव प्रौद्योगिकी, पर्यटन, आतिथ्य और फिल्म निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।कनेक्टिविटी को भी एक अहम विषय माना गया, क्योंकि बेहतर संपर्क से व्यापार और पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिल सकता है। इसके अलावा, भारत ने उत्तर मैसेडोनिया के लिए भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण स्लॉट दोगुने करने की प्रतिबद्धता जताई, जिसमें एआई से जुड़े पाठ्यक्रम भी शामिल होंगे।

स्वास्थ्य और क्षमता निर्माण में बढ़ती साझेदारी

यात्रा के दौरान दोनों देशों ने स्वास्थ्य सहयोग पर अपने समझौता ज्ञापन को अगले पांच वर्षों के लिए नवीनीकृत किया। इसमें पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के क्षेत्र में सहयोग भी शामिल है। यह कदम स्वास्थ्य कूटनीति और ज्ञान-साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।भारत की क्षमता निर्माण नीति के तहत आईटीईसी कार्यक्रम लंबे समय से साझेदार देशों के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास का प्रमुख मंच रहा है। उत्तर मैसेडोनिया के साथ इस सहयोग का विस्तार भारत की वैश्विक साझेदारी रणनीति को भी दर्शाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत और उत्तर मैसेडोनिया के बीच राजनयिक संबंध 1995 में स्थापित हुए थे।
  • 2025 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 133 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
  • आईटीईसी भारत का क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसके तहत साझेदार देशों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस भारत-नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय पहलें हैं।

इस यात्रा ने स्पष्ट किया कि भारत और उत्तर मैसेडोनिया अब केवल औपचारिक कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि व्यापार, तकनीक, स्वास्थ्य और कौशल विकास के जरिए साझेदारी को अधिक व्यावहारिक और परिणामोन्मुख बनाना चाहते हैं।

Originally written on July 22, 2026 and last modified on July 22, 2026.

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