आंध्र प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर से निर्यात और निवेश को नई रफ्तार
आंध्र प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात आधारित उद्योगों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। 21 जुलाई 2026 को आंध्र प्रदेश आर्थिक विकास बोर्ड और यूएई फूड क्लस्टर के बीच अमरावती में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और यूएई के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री मौजूद थे।
क्या है प्रस्तावित फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर
फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर का मतलब ऐसे औद्योगिक क्षेत्र से है, जहां कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, भंडारण और निर्यात से जुड़ी इकाइयाँ एक साथ विकसित की जाती हैं। आंध्र प्रदेश में प्रस्तावित यह क्लस्टर बागवानी, मत्स्य पालन, लॉजिस्टिक्स और कोल्ड-चेन ढांचे से जुड़ा होगा। इससे न केवल उत्पादों की बर्बादी घटेगी, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार तक बेहतर गुणवत्ता के साथ पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
निवेश और निर्यात के लिए बड़ा अवसर
इस सहयोग के तहत दुबई स्थित फ्लोर मास्टर्स इंटरनेशनल ने चित्तूर जिले के गंगाधर नेल्लोर में एक फूड प्रोसेसिंग यूनिट के लिए 100 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश की घोषणा की है। यह इकाई लगभग 25 देशों के लिए निर्यात केंद्र के रूप में विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य ऐसे खाद्य उत्पाद तैयार करना है, जिनकी मांग विदेशी बाजारों में हो और जिन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ा जा सके।
किस उत्पाद समूह पर रहेगा फोकस
यह साझेदारी बागवानी उत्पादों की एकीकृत वैल्यू चेन पर केंद्रित है, जिसमें आम, केला और कोको जैसे उत्पाद शामिल हैं। इसके साथ ही समुद्री उत्पाद, डेयरी, पोल्ट्री, दालें और अन्य कृषि-आधारित वस्तुओं के व्यापार को भी कोल्ड-चेन सुविधाओं और शिपिंग लिंक के जरिए बढ़ावा दिया जाएगा। आंध्र प्रदेश की मजबूत बागवानी और aquaculture आधारित अर्थव्यवस्था इस परियोजना को स्वाभाविक बढ़त देती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आंध्र प्रदेश आर्थिक विकास बोर्ड राज्य में निवेश प्रोत्साहन और औद्योगिक समन्वय से जुड़ी प्रमुख एजेंसी है।
- कोल्ड-चेन ढांचा तापमान नियंत्रित भंडारण और परिवहन व्यवस्था को कहा जाता है, जो जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए जरूरी है।
- कृष्णापटनम पोर्ट और काकीनाडा पोर्ट भारत के पूर्वी तट पर महत्वपूर्ण समुद्री द्वार हैं।
- आंध्र प्रदेश में बागवानी और मत्स्य पालन का बड़ा आधार खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है।
यह समझौता आंध्र प्रदेश को कृषि-आधारित निर्यात और वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि प्रस्तावित क्लस्टर समय पर विकसित होता है, तो इससे निवेश, रोजगार और निर्यात तीनों क्षेत्रों को लाभ मिल सकता है।