अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता: ऊर्जा सहयोग के साथ सुरक्षा बहस भी तेज

अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौता: ऊर्जा सहयोग के साथ सुरक्षा बहस भी तेज

22 जुलाई 2026 को अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ 30 साल के नागरिक परमाणु सहयोग समझौते को मंजूरी दी। यह समझौता दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग का कानूनी ढांचा तय करता है और इसके जरिए सऊदी अरब में परमाणु ढांचे के विकास में अमेरिकी कंपनियों की अहम भूमिका रहने की संभावना है।

समझौते का ढांचा और दायरा

यह व्यवस्था अमेरिका के Atomic Energy Act, 1954 की Section 123 के तहत आती है। इसी कारण इसे सामान्य तौर पर 123 Agreement कहा जाता है। ऐसे समझौते नागरिक परमाणु रिएक्टर, ईंधन आपूर्ति, तकनीकी सहयोग और सुरक्षा मानकों से जुड़े प्रावधानों को कवर कर सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते में सऊदी अरब में एक यूरेनियम संवर्धन सुविधा की संभावना भी शामिल हो सकती है, लेकिन यह संयुक्त अध्ययन के नतीजों पर निर्भर करेगी। यानी अभी यह अंतिम निर्णय नहीं, बल्कि संभावित विकल्प के रूप में रखा गया है।

सुरक्षा प्रावधानों पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

इस समझौते में वह Gold Standard पैकेज शामिल नहीं है, जिसे परमाणु अप्रसार के लिहाज से कड़ा माना जाता है। आम तौर पर इस मानक में साझेदार देश में यूरेनियम संवर्धन और खर्चित ईंधन के पुनर्संसाधन पर रोक लगाई जाती है। इसके अलावा, समझौते में IAEA Additional Protocol भी शामिल नहीं है। यह प्रोटोकॉल अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को मानक सुरक्षा समझौते से आगे जाकर अधिक निरीक्षण और सत्यापन अधिकार देता है। इसी वजह से इस सौदे को लेकर पारदर्शिता और अप्रसार से जुड़ी बहस तेज हो गई है।

सऊदी अरब की परमाणु नियामक स्थिति और आगे की प्रक्रिया

सऊदी अरब ने 2024 के अंत में IAEA के साथ अपना small quantities protocol वापस ले लिया था, जिससे उसके व्यापक सुरक्षा समझौते का पूर्ण क्रियान्वयन संभव हुआ। हालांकि, उसने अभी तक Additional Protocol नहीं अपनाया है। अमेरिका और सऊदी अरब ने 2025 में रियाद में एक प्रारंभिक परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। मौजूदा व्यवस्था उसी समझौते को आगे बढ़ाती है और लंबे समय के नागरिक परमाणु सहयोग की नींव रखती है। यह समझौता आने वाले दिनों में अमेरिकी कांग्रेस के पास समीक्षा के लिए भेजा जाएगा, लेकिन 123 ढांचे के तहत इसके प्रभावी होने के लिए कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य नहीं होती।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • Atomic Energy Act, 1954 अमेरिका का वह प्रमुख कानून है जो विदेशी देशों के साथ नागरिक परमाणु सहयोग को नियंत्रित करता है।
  • 123 Agreement का नाम इसी कानून की Section 123 से लिया गया है।
  • IAEA संयुक्त राष्ट्र की वह एजेंसी है जो परमाणु सुरक्षा और सत्यापन की निगरानी करती है।
  • Gold Standard ऐसे परमाणु समझौतों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है, जिनमें संवर्धन और पुनर्संसाधन पर रोक होती है।

यह समझौता ऊर्जा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर सकता है, लेकिन इसके साथ परमाणु अप्रसार, निरीक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल भी बने रहेंगे।

Originally written on July 22, 2026 and last modified on July 22, 2026.

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