हरियाणा ने यमुना प्रदूषण नियंत्रण परियोजनाओं के लिए तय की 2027 की समयसीमा

हरियाणा ने यमुना प्रदूषण नियंत्रण परियोजनाओं के लिए तय की 2027 की समयसीमा

हरियाणा सरकार ने यमुना नदी को प्रदूषण से मुक्त करने के उद्देश्य से चल रही और प्रस्तावित सभी प्रमुख परियोजनाओं के लिए 31 दिसंबर 2027 की अंतिम समयसीमा निर्धारित की है। 9 जून 2026 को घोषित इस व्यापक कार्ययोजना में सीवेज उपचार, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन, नालों की निगरानी और नदी पुनर्जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कदम शामिल हैं। यह पहल यमुना नदी की जल गुणवत्ता में सुधार और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।

यमुना प्रदूषण नियंत्रण की रूपरेखा

Yamuna River गंगा नदी प्रणाली की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है। इसका उद्गम Uttarakhand में होता है और यह Haryana, Delhi तथा Uttar Pradesh से होकर बहती है। यमुना बेसिन में प्रदूषण नियंत्रण के तहत मुख्य रूप से सीवेज को नदी में जाने से रोकना, औद्योगिक अपशिष्टों का उपचार करना और नदी में गिरने वाले नालों की निगरानी करना शामिल है। भारत की सबसे अधिक प्रदूषित नदियों में शामिल यमुना की सफाई के लिए विभिन्न राज्यों और एजेंसियों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक माने जाते हैं।

सीवेज और अपशिष्ट उपचार ढांचे का विस्तार

13 मार्च 2026 तक हरियाणा में 91 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) संचालित थे, जिनकी कुल क्षमता 1,543 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) थी। इसके अतिरिक्त 88 एमएलडी की संयुक्त क्षमता वाले तीन नए एसटीपी निर्माणाधीन हैं, जिन्हें मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने यमुना जलग्रहण क्षेत्र में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी), माइक्रो एसटीपी तथा अपशिष्ट जल को उपचार संयंत्रों तक पहुंचाने वाली अवसंरचना विकसित करने की भी योजना बनाई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंत तक यमुना में गिरने वाले सभी नालों के जल का वैज्ञानिक उपचार सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मिशन मोड में होगा नदी पुनर्जीवन

3 जून 2026 से यमुना पुनर्जीवन कार्यक्रम को मिशन मोड में शुरू किया गया है। 8 जून 2026 को आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में परियोजनाओं की समीक्षा के लिए 20-दिवसीय चक्र तय किया गया। साथ ही वर्ष 2027 तक Delhi, Haryana और Uttar Pradesh में कुल 59 नए एसटीपी स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह बहु-राज्यीय प्रयास यमुना बेसिन में प्रदूषण नियंत्रण और जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ड्रोन सर्वेक्षण और पर्यावरणीय निगरानी

हरियाणा सरकार ने यमुना में मिलने वाले नालों और उप-नालों की पहचान तथा निगरानी के लिए क्षेत्रवार ड्रोन सर्वेक्षण कराने की योजना बनाई है। इन सर्वेक्षणों के माध्यम से जल प्रवाह, जल गुणवत्ता और प्रदूषण के स्रोतों का सटीक आकलन किया जा सकेगा। इसके अलावा राज्य के 2026-27 के बजट में जलवायु अनुकूलन और पर्यावरण संरक्षण उपायों के लिए 100 करोड़ रुपये के जलवायु कोष का प्रस्ताव भी रखा गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • यमुना नदी गंगा की सबसे महत्वपूर्ण सहायक नदियों में से एक है और इसकी कुल लंबाई लगभग 1,376 किलोमीटर है।
  • एसटीपी (Sewage Treatment Plant) का उपयोग घरेलू सीवेज के उपचार के लिए किया जाता है।
  • सीईटीपी (Common Effluent Treatment Plant) औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल के उपचार के लिए स्थापित किए जाते हैं।
  • एमएलडी (Million Litres per Day) जल उपचार क्षमता मापने की एक मानक इकाई है।

यमुना नदी के संरक्षण के लिए हरियाणा द्वारा निर्धारित नई समयसीमा और व्यापक कार्ययोजना पर्यावरणीय सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जाता है, तो इससे यमुना की जल गुणवत्ता में सुधार होगा, जैव विविधता को संरक्षण मिलेगा और लाखों लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। यह पहल भविष्य में अन्य नदी संरक्षण कार्यक्रमों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।

Originally written on June 10, 2026 and last modified on June 10, 2026.

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