तेलंगाना में सुपरअलॉय संयंत्र से एयरोस्पेस निर्माण को नई मजबूती
रघु वम्सी एयरोस्पेस ग्रुप ने तेलंगाना में 600 करोड़ रुपये की एकीकृत सुपरअलॉय निर्माण सुविधा स्थापित करने की घोषणा की है। यह परियोजना भारत के उन चुनिंदा संयंत्रों में शामिल होगी, जहां निकेल-आधारित सुपरअलॉय का एकीकृत उत्पादन किया जाएगा। एयरोस्पेस और रक्षा निर्माण के लिए यह कदम घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
परियोजना का आकार और उत्पादन क्षमता
प्रस्तावित परिसर 50 एकड़ में विकसित किया जाएगा और इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 5,000 टन होगी। यहां राउंड बार, वायर, फोर्जिंग, कास्टिंग और टंगस्टन कार्बाइड पाउडर जैसे उत्पाद बनाए जाएंगे। ये सभी सामग्री उच्च तापमान और उच्च दबाव वाले औद्योगिक उपयोगों में काम आती हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सामग्री की मजबूती और विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण होती है।
हैदराबाद के पास रणनीतिक औद्योगिक लोकेशन
यह एकीकृत विनिर्माण परिसर हैदराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास हार्डवेयर पार्क में प्रस्तावित है। तेलंगाना का यह क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों के लिए पहले से महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यहां ऐसी परियोजना का आना एयरोस्पेस क्लस्टर को और गति दे सकता है। कंपनी के अनुसार वाणिज्यिक उत्पादन जनवरी 2028 से शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
नेतृत्व, निवेश और औद्योगिक महत्व
इस परियोजना का नेतृत्व एमिश्रा धातु निगम लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. एस.के. झा करेंगे। इससे पहले 20 जुलाई 2026 को रघु वम्सी एयरोस्पेस ग्रुप ने नॉरवेस्ट और स्केगन एसेट मैनेजमेंट के नेतृत्व में 40 मिलियन डॉलर, यानी लगभग 400 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई थी। यह निवेश कंपनी की विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और रणनीतिक धातुओं के क्षेत्र में विस्तार की योजना को समर्थन देगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सुपरअलॉय उच्च प्रदर्शन वाली मिश्रधातुएं होती हैं, जिनका उपयोग जेट इंजन और गैस टर्बाइन जैसे क्षेत्रों में होता है।
- निकेल-आधारित सुपरअलॉय ऊंचे तापमान पर भी मजबूती बनाए रखने के लिए जानी जाती हैं।
- मिश्रा धातु निगम लिमिटेड भारत की एक सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई है, जो विशेष धातुओं और रक्षा सामग्री से जुड़ी है।
- फार्नबरो इंटरनेशनल एयरशो ब्रिटेन में आयोजित होने वाला एक प्रमुख वैश्विक एयरोस्पेस और रक्षा आयोजन है।
इस परियोजना से भारत की एयरोस्पेस और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, रणनीतिक उपयोग वाली निकेल मिश्रधातुओं के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।