सेथुरामन पंचनाथन को मिला प्रतिष्ठित आर्थर एम. ब्यूश पुरस्कार

सेथुरामन पंचनाथन को मिला प्रतिष्ठित आर्थर एम. ब्यूश पुरस्कार

भारतीय मूल के वैज्ञानिक सेथुरामन पंचनाथन को 2026 के आर्थर एम. ब्यूश पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह सम्मान नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग (NAE) की ओर से दिया जाएगा और 4 अक्टूबर 2026 को वाशिंगटन, डी.सी. में होने वाली वार्षिक बैठक में प्रदान किया जाएगा। इस उपलब्धि के साथ पंचनाथन इस पुरस्कार के इतिहास में पहले भारतीय अमेरिकी और पहले एरिज़ोनावासी बन गए हैं।

क्यों खास है यह सम्मान

आर्थर एम. ब्यूश पुरस्कार इंजीनियरिंग और विज्ञान नीति के बीच मजबूत संबंध बनाने वाले व्यक्तियों को दिया जाता है। यह उन इंजीनियरों को सम्मानित करता है जिन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास, नीति-निर्माण में सक्रिय भूमिका और उद्योग, सरकार तथा विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने में योगदान दिया हो। पंचनाथन को यह सम्मान उनके नेतृत्व, नवाचार और विज्ञान-तकनीक को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने वाली सोच के लिए दिया जा रहा है।

पंचनाथन का करियर और सार्वजनिक भूमिका

सेथुरामन पंचनाथन जून 2020 से अप्रैल 2025 तक संयुक्त राज्य अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF) के 15वें निदेशक रहे। NSF अमेरिका की वह संघीय एजेंसी है जो मूलभूत शोध और विज्ञान-इंजीनियरिंग शिक्षा को समर्थन देती है। उनके कार्यकाल में टेक्नोलॉजी, इनोवेशन एंड पार्टनरशिप्स (TIP) निदेशालय की स्थापना भी एक महत्वपूर्ण कदम माना गया, जिसे NSF में तीन दशकों बाद बनाया गया पहला नया निदेशालय कहा जाता है।

वे 1997 से एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं और वर्तमान में वहां यूनिवर्सिटी प्रोफेसर ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन के रूप में कार्यरत हैं। अप्रैल 2026 में फीनिक्स की मेयर केट गैलेगो ने उन्हें फीनिक्स क्वांटम स्ट्रैटेजी का नेतृत्व सौंपा। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि वे केवल अकादमिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उभरती तकनीकों की नीति और रणनीति में भी सक्रिय रहे हैं।

पुरस्कार की पृष्ठभूमि और व्यापक महत्व

NAE ने आर्थर एम. ब्यूश पुरस्कार की स्थापना 1982-83 में की थी। यह सम्मान उन इंजीनियरों को दिया जाता है जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति में सक्रिय भागीदारी के साथ-साथ तकनीकी विकास को बढ़ावा देते हैं। पुरस्कार का फोकस विशेष रूप से ट्रांसलेशनल रिसर्च जैसी प्रक्रियाओं पर है, जिसमें प्रयोगशाला में हुए शोध को वास्तविक जीवन में उपयोगी समाधान में बदला जाता है।

पंचनाथन को 2025 में भारत का पद्मश्री भी मिल चुका है, जो उनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और योगदान को और मजबूत करता है। विज्ञान, नवाचार और नीति के संगम पर उनका काम आज के समय में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि आधुनिक तकनीकी विकास केवल शोध तक सीमित नहीं, बल्कि उसके सामाजिक और औद्योगिक उपयोग से भी जुड़ा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आर्थर एम. ब्यूश पुरस्कार नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग (NAE) द्वारा दिया जाता है।
  • इस पुरस्कार की शुरुआत 1982-83 में हुई थी।
  • सेथुरामन पंचनाथन इस पुरस्कार को पाने वाले पहले भारतीय अमेरिकी और पहले एरिज़ोनावासी हैं।
  • पंचनाथन 2020 से 2025 तक अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF) के निदेशक रहे।

सेथुरामन पंचनाथन की यह उपलब्धि विज्ञान, नीति और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय मूल के विशेषज्ञों की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करती है।

Originally written on September 17, 2026 and last modified on September 17, 2026.

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