स्टेम सेल थेरेपी पर सख्ती, अब केवल मंजूर इलाज में ही उपयोग

स्टेम सेल थेरेपी पर सख्ती, अब केवल मंजूर इलाज में ही उपयोग

केंद्र सरकार ने भारत में स्टेम सेल थेरेपी के उपयोग को लेकर नियम और कड़े कर दिए हैं। 16 सितंबर 2026 को स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी सलाह में साफ किया कि स्टेम सेल उपचार को केवल उन्हीं रोग स्थितियों में मानक चिकित्सा के रूप में अपनाया जा सकता है, जिन्हें मंत्रालय ने पहले से मंजूरी दी है। इसके बाहर इसका क्लिनिकल उपयोग अब स्वीकार्य नहीं होगा।

स्टेम सेल थेरेपी पर नई सीमा

स्टेम सेल वे अविभेदित कोशिकाएं होती हैं, जिनमें स्वयं को पुनः बनाने और अलग-अलग विशेष कोशिकाओं में बदलने की क्षमता होती है। इसी वजह से इन्हें चिकित्सा अनुसंधान और कुछ उपचारों में महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में यह थेरेपी केवल अनुमोदित संकेतों के लिए ही मानक देखभाल के रूप में दी जा सकती है।

विशेष रूप से ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के मामले में किसी भी प्रकार की स्टेम सेल थेरेपी का उपयोग केवल विधिवत स्वीकृत क्लिनिकल ट्रायल के भीतर ही किया जा सकेगा। यानी बिना मंजूरी के इसे इलाज के रूप में देना अब नियमों के खिलाफ माना जाएगा।

नियामक ढांचा और पेशेवर जिम्मेदारी

भारत में स्टेम सेल अनुसंधान और उससे जुड़े नैतिक मानकों के लिए नेशनल गाइडलाइंस फॉर स्टेम सेल रिसर्च, 2017 लागू हैं। इन्हें भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने संयुक्त रूप से जारी किया था। ये दिशानिर्देश शोध, क्लिनिकल ट्रायल और नैतिक अनुपालन की रूपरेखा तय करते हैं।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने 5 सितंबर 2026 को इसी विषय पर सलाह जारी की थी। उसमें कहा गया था कि मंजूर संकेतों से बाहर स्टेम सेल थेरेपी का अनधिकृत उपयोग, प्रिस्क्रिप्शन, प्रचार या विज्ञापन पेशेवर कदाचार की श्रेणी में आएगा। इससे चिकित्सा संस्थानों और डॉक्टरों पर जवाबदेही और बढ़ गई है।

कानूनी आधार और राज्यों की भूमिका

यह नया रुख 30 जनवरी 2026 को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले Yash Charitable Trust & Ors. v. Union of India & Ors. के बाद और मजबूत हुआ है। मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे अदालत के निर्देशों को राज्य और जिला नियामक प्राधिकरणों तथा क्लिनिकल संस्थानों तक पहुंचाएं।

निर्देशों का पालन न करने पर इंडियन मेडिकल काउंसिल रेगुलेशंस, 2002 के रेगुलेशन 7.22 के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट, 2010 की धारा 32 और 40 के तहत पंजीकरण रद्द करने और आर्थिक दंड जैसी कार्रवाई भी संभव है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • स्टेम सेल ऐसी कोशिकाएं होती हैं जो स्वयं को दोहरा सकती हैं और विशेष प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती हैं।
  • भारत में स्टेम सेल अनुसंधान के लिए नेशनल गाइडलाइंस फॉर स्टेम सेल रिसर्च, 2017 लागू हैं।
  • ICMR और DBT ने इन दिशानिर्देशों को संयुक्त रूप से जारी किया था।
  • क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट, 2010 क्लिनिकल संस्थानों के नियमन और दंड का प्रावधान करता है।

कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम स्टेम सेल थेरेपी के नाम पर होने वाले अनियंत्रित और अप्रमाणित इलाज पर रोक लगाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इससे मरीजों की सुरक्षा, चिकित्सा नैतिकता और वैज्ञानिक मानकों को प्राथमिकता मिलेगी।

Originally written on September 17, 2026 and last modified on September 17, 2026.

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