चाँद पर मिला नया विशाल गड्ढा, LRO ने दर्ज की ताज़ा टक्कर

चाँद पर मिला नया विशाल गड्ढा, LRO ने दर्ज की ताज़ा टक्कर

नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) ने चंद्रमा के निकटवर्ती भाग पर एक नया प्रभाव-गड्ढा पहचाना है, जो 11 अप्रैल से 22 मई 2024 के बीच बना। इस गड्ढे का नाम मैकगेटचिन रखा गया है। इसका व्यास लगभग 222 मीटर और गहराई 43 मीटर तक बताई गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह हाल के समय में सौरमंडल में दर्ज सबसे बड़ा ज्ञात नया प्रभाव-गड्ढा है।

मैकगेटचिन क्रेटर क्यों खास है

यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चंद्रमा पर होने वाली नई टक्करों को सीधे देख पाना आसान नहीं होता। मैकगेटचिन क्रेटर का आकार पहले LRO द्वारा लगभग एक दशक पहले पहचाने गए ऐसे ही रिकॉर्ड-धारी गड्ढे से करीब तीन गुना बड़ा है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि छोटे-से-छोटे पिंड भी चंद्र सतह पर कितनी बड़ी क्षति कर सकते हैं।

टक्कर करने वाला पिंड अनुमानतः तीन से छह मंजिला इमारत के आकार का था। दिलचस्प बात यह है कि यह घटना पृथ्वी पर मौजूद दूरबीनों और अंतरिक्ष-आधारित निगरानी प्रणालियों से भी तुरंत पकड़ में नहीं आई। बाद में LRO की तस्वीरों और विश्लेषण से इसकी पुष्टि हुई।

चंद्र सतह पर टक्कर का असर

इस प्रभाव ने चंद्र सतह से सामग्री को 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तक उछाल दिया। वैज्ञानिकों ने पाया कि धूल और चट्टानी मिट्टी अपेक्षा से अधिक कोण पर बाहर निकली। गड्ढे के आसपास लगभग 7 किलोमीटर चौड़ा एक ठंडा क्षेत्र भी दर्ज किया गया, जो ऊपरी मिट्टी की परत के ढीली होने का संकेत देता है।

चंद्रमा की ऊपरी परत को रेगोलिथ कहा जाता है। यह चट्टान के टुकड़ों, धूल और पुराने प्रभावों से बने मलबे की परत होती है। चूंकि चंद्रमा पर वायुमंडल लगभग नहीं है, इसलिए उल्कापिंड, क्षुद्रग्रह या धूमकेतु सीधे सतह से टकराकर ऐसे गड्ढे बना सकते हैं।

वैज्ञानिक अध्ययन और LRO की भूमिका

LRO को 2009 में चंद्रमा की सतह, प्रकाश व्यवस्था, विकिरण और संरचना का अध्ययन करने के लिए लॉन्च किया गया था। इसी मिशन ने चंद्रमा के निकटवर्ती भाग की विस्तृत तस्वीरें लेकर इस नए गड्ढे की पहचान की। व्यापक कोण वाली तस्वीरों का विश्लेषण अगस्त 2025 में किया गया, जबकि बाद में और अधिक विस्तृत चित्र जुटाए गए।

इस खोज की पुष्टि 2026 की शुरुआत में हुई और 15 सितंबर 2026 को Science Advances में इससे जुड़ी दो अध्ययन रिपोर्ट प्रकाशित की गईं। मैकगेटचिन नामकरण ह्यूस्टन स्थित लूनर एंड प्लैनेटरी इंस्टीट्यूट के थॉमस मैकगेटचिन के सम्मान में किया गया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • चंद्रमा का निकटवर्ती भाग वह हिस्सा है जो हमेशा पृथ्वी की ओर रहता है, क्योंकि चंद्रमा ज्वारीय रूप से पृथ्वी से बंधा है।
  • नासा का Lunar Reconnaissance Orbiter 2009 से चंद्रमा का अध्ययन कर रहा है।
  • रेगोलिथ चंद्रमा, मंगल और कई वायुरहित पिंडों की ढीली सतही परत होती है।
  • Science Advances अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ साइंस द्वारा प्रकाशित एक पीयर-रिव्यूड जर्नल है।

मैकगेटचिन क्रेटर की खोज चंद्रमा पर हालिया टक्करों की प्रकृति, सतही परत की संरचना और अंतरिक्षीय प्रभावों को समझने के लिए एक अहम वैज्ञानिक संकेत देती है।

Originally written on September 17, 2026 and last modified on September 17, 2026.

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