किसानों को मिट्टी कार्बन का सीधा भुगतान, हरित खेती को नई पहचान
भारत में पहली बार किसानों को मिट्टी कार्बन क्रेडिट के बदले सीधे लाभ हस्तांतरण के तहत भुगतान शुरू किया गया है। 16-17 सितंबर 2026 को पंजाब और हरियाणा के 2,500 से अधिक छोटे किसानों को यह भुगतान मिला, जिसकी कुल राशि 2.9 करोड़ रुपये से ज्यादा रही। यह भुगतान उन सत्यापित कार्बन क्रेडिट से जुड़ा था, जो आदि किसान कार्बन कार्यक्रम के तहत पुनर्योजी खेती पद्धतियों से अर्जित किए गए थे।
मिट्टी कार्बन क्रेडिट क्या हैं
मिट्टी कार्बन क्रेडिट कृषि क्षेत्र में उत्सर्जन घटाने और मिट्टी में कार्बन बढ़ाने वाली गतिविधियों से बनते हैं। जब किसान ऐसी पद्धतियां अपनाते हैं जिनसे मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ता है या ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम होता है, तो उसके आधार पर कार्बन यूनिट तैयार की जाती हैं। इन्हीं यूनिट्स को कार्बन क्रेडिट कहा जाता है।
इस कार्यक्रम में कृषि कार्बन क्रेडिट Verra VM0042 पद्धति के तहत जारी किए गए। यह भूमि-प्रबंधन परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल होने वाला एक मानक कार्बन लेखांकन ढांचा है, जिसमें फील्ड-स्तर पर सत्यापन, मापन, रिपोर्टिंग और तृतीय-पक्ष पुष्टि की प्रक्रिया शामिल होती है।
किसानों ने कौन-सी पद्धतियां अपनाईं
2019 से 2022 के बीच भाग लेने वाले किसानों ने डायरेक्ट सीडेड राइस, कम जुताई और फसल अवशेष प्रबंधन जैसी तकनीकें अपनाईं। डायरेक्ट सीडेड राइस में धान के बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं, नर्सरी से रोपाई नहीं की जाती। इससे श्रम और पानी की बचत के साथ कुछ परिस्थितियों में मीथेन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है।
कम जुताई मिट्टी को कम छेड़ने की संरक्षण कृषि पद्धति है, जबकि फसल अवशेष प्रबंधन में पराली या अवशेषों को खेत में बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। इन उपायों से मिट्टी की सेहत बेहतर होने, नमी बचने और पराली जलाने की जरूरत घटने जैसे लाभ जुड़े हैं।
कार्यक्रम का दायरा और पर्यावरणीय असर
आदि कार्यक्रम की शुरुआत 2019 में Grow Indigo ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तकनीकी मार्गदर्शन में की थी। यह सात राज्यों में 20 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र और एक लाख से ज्यादा किसानों तक फैला हुआ है, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी कृषि कार्बन-क्रेडिट पहलों में से एक बन गया है।
इस कार्यक्रम के तहत 2019-22 के दौरान अनुमानित 45 अरब लीटर पानी की बचत दर्ज की गई और 2 लाख टन से अधिक फसल-अवशेष जलाने से बचाव हुआ। किसानों को उनके खेतों से उत्पन्न सत्यापित कार्बन क्रेडिट के आधार पर लगभग 3,000 रुपये से 15,000 रुपये तक मिले, जो खेत-स्तरीय हरित प्रथाओं को आर्थिक प्रोत्साहन देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ICAR का पूरा नाम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद है, जो कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के तहत काम करती है।
- Direct Seeded Rice धान की वह विधि है जिसमें बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं, रोपाई नहीं की जाती।
- Reduced tillage संरक्षण कृषि की तकनीक है, जिसमें खेत तैयार करते समय मिट्टी को कम उलट-पलट किया जाता है।
- Verra स्वैच्छिक कार्बन बाजारों के लिए एक वैश्विक मानक संस्था है और VM0042 इसकी कृषि-भूमि प्रबंधन संबंधी पद्धति है।
यह पहल दिखाती है कि जलवायु-अनुकूल खेती केवल पर्यावरणीय लक्ष्य नहीं, बल्कि किसानों के लिए अतिरिक्त आय का भी जरिया बन सकती है। आने वाले समय में ऐसे मॉडल कृषि, जल संरक्षण और कार्बन बाजारों के बीच नई कड़ी बना सकते हैं।