सार्थक-पीडीएस योजना को मंजूरी
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 27 मई 2026 को “सार्थक-पीडीएस” योजना को मंजूरी दी। इस योजना का पूरा नाम “स्कीम फॉर असिस्टेंस इन राशन ट्रांसपोर्ट एंड हैंडलिंग–इनकम विद ऑटोमेशन इन पीडीएस” है। योजना के लिए केंद्र सरकार ने 25,530 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है और इसे अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक लागू किया जाएगा।
पीडीएस और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम
सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को रियायती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों को सब्सिडी वाला अनाज वितरित किया जाता है। यह व्यवस्था केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से संचालित होती है।
सार्थक-पीडीएस योजना की मुख्य विशेषताएं
सार्थक-पीडीएस योजना के अंतर्गत दो पुरानी योजनाओं को एकीकृत किया गया है। इनमें राज्यों के भीतर खाद्यान्न परिवहन और उचित मूल्य दुकान संचालकों के मार्जिन से जुड़ी योजना तथा स्मार्ट पीडीएस आधुनिकीकरण योजना शामिल हैं। नई योजना के तहत खाद्यान्न के परिवहन और भंडारण के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही उचित मूल्य दुकानों के संचालकों को बेहतर मार्जिन भी प्रदान किया जाएगा, जिससे अंतिम उपभोक्ता तक वितरण प्रणाली मजबूत हो सके।
तकनीक आधारित आधुनिक पीडीएस
इस योजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण और ब्लॉकचेन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। “निर्मल” नामक एआई आधारित प्रणाली लाभार्थियों का रियल-टाइम डेटा प्रबंधन करेगी। “आशा” प्लेटफॉर्म बहुभाषी शिकायत निवारण और नागरिक संवाद के लिए विकसित किया गया है। वहीं “सक्षम” प्रणाली सप्लाई चेन प्रबंधन को मजबूत करेगी, जिसमें क्यूआर कोड ट्रैकिंग और जीपीएस आधारित वाहन निगरानी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 में लागू किया गया था। ” भारत में राशन वितरण उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से किया जाता है। ” ब्लॉकचेन तकनीक सप्लाई चेन की पारदर्शिता बढ़ाने में उपयोगी मानी जाती है। ” पीडीएस भारत की सबसे बड़ी खाद्य सब्सिडी वितरण प्रणाली है। सार्थक-पीडीएस योजना भारत की खाद्य वितरण व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इससे लाभार्थियों तक समय पर राशन पहुंचाने, भ्रष्टाचार कम करने और वितरण प्रणाली को अधिक कुशल बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।