सहकारी जीवन बीमा कंपनी स्थापित करेगी सरकार, सहकारिता क्षेत्र को मिलेगा नया विस्तार
केंद्र सरकार ने सहकारिता क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। 6 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस समारोह के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देश में एक सहकारी जीवन बीमा कंपनी स्थापित करने की योजना की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं के माध्यम से बीमा सेवाओं की पहुंच बढ़ाना, ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करना तथा सहकारी आंदोलन को नई गति देना है।
सहकारी बीमा क्या है?
सहकारी बीमा ऐसी व्यवस्था है, जिसमें बीमा सेवाओं का संचालन सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किया जाता है। ये संस्थाएं अपने सदस्यों के स्वामित्व और नियंत्रण में कार्य करती हैं तथा लाभ कमाने के बजाय सदस्यों के हितों को प्राथमिकता देती हैं। प्रस्तावित सहकारी मॉडल में जीवन बीमा सेवाओं को शामिल किया जाएगा। इससे पहले ‘सहकारी इंश्योरेंस सर्विसेज’ की अवधारणा के तहत स्वास्थ्य, जीवन, कृषि और दुर्घटना बीमा जैसी सेवाओं को भी सहकारी ढांचे के माध्यम से उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी।
बीमा वितरण में सहकारी संस्थाओं की भूमिका
सहकारी क्षेत्र के माध्यम से बीमा सेवाओं के विस्तार के लिए संस्थागत ढांचा लगातार मजबूत किया जा रहा है। 3 मार्च 2026 तक भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने 150 से अधिक सहकारी बैंकों और सहकारी समितियों को बीमा वितरण के लिए कॉरपोरेट एजेंट के रूप में पंजीकृत किया था। इसके अलावा, 24 फरवरी 2026 तक देश में 52,369 प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पीएसीएस) कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के रूप में कार्य कर रही थीं। इन समितियों के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर बीमा उत्पादों और अन्य डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। इससे गांवों में रहने वाले लोगों के लिए बीमा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक सुलभ होने की उम्मीद है।
भारत टैक्सी मॉडल और अन्य सहकारी पहल
सरकार ने प्रस्तावित सहकारी बीमा मॉडल के संदर्भ में ‘भारत टैक्सी’ सहकारी मॉडल का भी उल्लेख किया। इस पहल का उद्देश्य सहकारी व्यवस्था के माध्यम से टैक्सी सेवाओं का विस्तार करना है और इसे अगले दो वर्षों में 500 शहरों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि इसी प्रकार सहकारी बीमा कंपनी भी व्यापक स्तर पर लोगों को वित्तीय सुरक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। मानव संसाधन विकास के लिए गुजरात के आनंद में स्थापित त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय का भी उल्लेख किया गया, जहां सहकारिता क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किए जाएंगे। साथ ही, सरकार ने आने वाले वर्षों में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सहकारी क्षेत्र के योगदान को तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सहकारिता मंत्रालय की स्थापना वर्ष 2021 में की गई थी।
- आईआरडीएआई (Insurance Regulatory and Development Authority of India) भारत में बीमा क्षेत्र का वैधानिक नियामक है, जिसकी स्थापना बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 के तहत हुई।
- प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS) भारत की अल्पकालिक ग्रामीण ऋण संरचना का सबसे निचला स्तर हैं।
- भारत में सहकारी समितियों से संबंधित प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 19(1)(c) तथा अनुच्छेद 43B में निहित हैं।
सहकारी जीवन बीमा कंपनी की स्थापना का प्रस्ताव ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को नई मजबूती दे सकता है। सहकारी संस्थाओं के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से बीमा सेवाओं की पहुंच बढ़ने से लाखों लोगों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। साथ ही, यह पहल सरकार के सहकारिता आधारित विकास मॉडल और समावेशी आर्थिक वृद्धि के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।