अग्निपथ योजना में अग्निवीरों की स्थायी भर्ती बढ़ाने पर सरकार कर रही समीक्षा
भारतीय सशस्त्र बलों में लागू अग्निपथ योजना को लेकर केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण समीक्षा प्रक्रिया से गुजर रही है। रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए), जिसकी अगुवाई चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान कर रहे हैं, अग्निवीरों की स्थायी नियुक्ति (रिटेंशन) की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीर अक्टूबर 2026 में अपना चार वर्षीय कार्यकाल पूरा करने वाले हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विभिन्न सेनाओं ने अपनी परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप रिटेंशन प्रतिशत बढ़ाने का सुझाव दिया है।
अग्निपथ योजना क्या है?
अग्निपथ योजना की शुरुआत जून 2022 में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना में युवाओं की भर्ती के लिए की गई थी। इस योजना के तहत चयनित युवाओं को “अग्निवीर” के रूप में चार वर्षों के लिए सेवा का अवसर मिलता है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, चार वर्ष पूरे होने के बाद केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को उनकी योग्यता, प्रदर्शन और सेवा की आवश्यकता के आधार पर नियमित सेवा में शामिल किया जाता है, जबकि शेष 75 प्रतिशत को सेवा से मुक्त कर दिया जाता है।
रिटेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव
रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय नौसेना ने विशेष रूप से तकनीकी शाखाओं में कार्यरत अग्निवीरों के लिए लगभग 75 प्रतिशत तक रिटेंशन की मांग की है। इसका प्रमुख कारण यह है कि इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण पर काफी समय और संसाधन खर्च होते हैं। वहीं, भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना ने लगभग 50 प्रतिशत तक रिटेंशन बढ़ाने का सुझाव दिया है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और प्रस्ताव पर विचार जारी है।
बदलाव की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?
आधुनिक युद्ध प्रणाली में ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, उन्नत संचार प्रणाली और अत्याधुनिक हथियारों के संचालन के लिए प्रशिक्षित एवं अनुभवी सैनिकों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। चार वर्षों के प्रशिक्षण और सेवा के बाद बड़ी संख्या में प्रशिक्षित अग्निवीरों के बाहर हो जाने से अनुभव का नुकसान होता है। इसी कारण सशस्त्र बल अधिक संख्या में प्रशिक्षित कर्मियों को अपने साथ बनाए रखने के पक्ष में हैं। इसके अलावा, प्रस्तावित बदलावों में ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले अग्निवीरों के परिवारों को आजीवन वित्तीय सहायता तथा सेवा से संबंधित दिव्यांगता की स्थिति में आजीवन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने जैसे प्रावधान भी शामिल बताए जा रहे हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अग्निपथ योजना की शुरुआत जून 2022 में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना में भर्ती के लिए की गई थी।
- प्रत्येक अग्निवीर का सेवा काल चार वर्ष का होता है।
- वर्तमान नियमों के अनुसार केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल किया जाता है।
- सैन्य मामलों का विभाग (डीएमए) रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और इसका नेतृत्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ करते हैं।
अग्निपथ योजना में प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को और मजबूत बनाना तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। यदि रिटेंशन प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो इससे अग्निवीरों के लिए दीर्घकालिक सैन्य करियर के अवसर बढ़ सकते हैं, साथ ही सेना, नौसेना और वायुसेना को अधिक अनुभवी और दक्ष बल उपलब्ध होगा।