संयुक्त राष्ट्र ने मीथेन उत्सर्जन और एआई पर्यावरणीय पारदर्शिता पर वैश्विक पहल शुरू की

संयुक्त राष्ट्र ने मीथेन उत्सर्जन और एआई पर्यावरणीय पारदर्शिता पर वैश्विक पहल शुरू की

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 23 जून 2026 को लंदन स्थित गिल्डहॉल में आयोजित लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दो महत्वपूर्ण वैश्विक पहलों की घोषणा की। इनमें ‘ग्लोबल कॉल टू एक्शन ऑन मीथेन’ और ‘एआई एनवायरनमेंटल ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव’ शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता उद्योग के पर्यावरणीय प्रभावों को अधिक पारदर्शी बनाना है। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे के बीच इन घोषणाओं को वैश्विक पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मीथेन उत्सर्जन पर वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता

मीथेन एक अत्यंत शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है, जो अल्पकालिक अवधि में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में लगभग 80 गुना अधिक ताप प्रभाव उत्पन्न कर सकती है। यह प्राकृतिक गैस का प्रमुख घटक भी है और जलवायु परिवर्तन का दूसरा सबसे बड़ा कारण मानी जाती है। तेल और गैस उद्योग से मीथेन का उत्सर्जन मुख्य रूप से रिसाव, वेंटिंग और फ्लेरिंग के माध्यम से होता है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि वर्तमान तकनीकों के माध्यम से तेल और गैस क्षेत्र से होने वाले लगभग 70 प्रतिशत मीथेन उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। उन्होंने उद्योग के लिए एक नए वैश्विक मानक की मांग की, जिससे पूरी आपूर्ति श्रृंखला में लगभग शून्य मीथेन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

फ्लेरिंग की समस्या और उसका प्रभाव

गुटेरेस ने अपने संबोधन में बताया कि वर्ष 2025 के दौरान विश्वभर में लगभग 167 अरब घन मीटर प्राकृतिक गैस फ्लेरिंग के माध्यम से जलाई गई। फ्लेरिंग वह प्रक्रिया है जिसमें तेल निष्कर्षण स्थलों पर अतिरिक्त प्राकृतिक गैस को नियंत्रित रूप से जलाया जाता है। हालांकि यह प्रक्रिया सुरक्षा कारणों से अपनाई जाती है, लेकिन इससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है और ऊर्जा संसाधनों की भी बड़ी मात्रा नष्ट होती है। इसलिए संयुक्त राष्ट्र इस प्रथा को कम करने और स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है।

एआई पर्यावरणीय पारदर्शिता पहल

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बढ़ते उपयोग के कारण डेटा केंद्रों की संख्या और उनकी ऊर्जा मांग लगातार बढ़ रही है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए ‘एआई एनवायरनमेंटल ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव’ की शुरुआत की गई है। इस पहल के तहत प्रमुख एआई कंपनियों से उनके कार्बन, जल और भूमि उपयोग से संबंधित पर्यावरणीय प्रभावों का सार्वजनिक खुलासा करने का आग्रह किया गया है। डेटा केंद्रों को संचालन के लिए भारी मात्रा में बिजली, शीतलन के लिए पानी तथा अवसंरचना निर्माण के लिए भूमि की आवश्यकता होती है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने एआई कंपनियों से वर्ष 2030 तक अपने सभी डेटा केंद्रों को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से संचालित करने का आह्वान किया। एक संयुक्त राष्ट्र अध्ययन के अनुसार 2030 तक एआई डेटा केंद्रों की बिजली खपत दुनिया के अधिकांश देशों से अधिक हो सकती है तथा इनकी जल आवश्यकता उप-सहारा अफ्रीका की 1.3 अरब आबादी की एक वर्ष की मूलभूत जरूरतों के बराबर हो सकती है।

जलवायु और ऊर्जा के व्यापक संदर्भ

लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक जलवायु नीति, अनुसंधान और जन-जागरूकता से जुड़ा एक प्रमुख वार्षिक वैश्विक कार्यक्रम है। यह मंच सरकारों, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और नागरिक समाज को जलवायु संबंधी चुनौतियों पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करता है। जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार मीथेन का वायुमंडलीय जीवनकाल कार्बन डाइऑक्साइड से कम होता है, लेकिन 20 वर्षों की अवधि में इसका ताप प्रभाव कहीं अधिक होता है। इसलिए मीथेन उत्सर्जन में त्वरित कमी जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के सबसे प्रभावी उपायों में से एक मानी जाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मीथेन प्राकृतिक गैस का मुख्य घटक है और इसे एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस माना जाता है।
  • फ्लेरिंग तेल निष्कर्षण स्थलों पर प्राकृतिक गैस को नियंत्रित रूप से जलाने की प्रक्रिया है।
  • डेटा केंद्र डिजिटल डेटा के भंडारण, प्रसंस्करण और वितरण के लिए उपयोग किए जाने वाले विशेष परिसर होते हैं।
  • नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में सौर, पवन, जलविद्युत और भू-तापीय ऊर्जा शामिल हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय (यूएनएफसीसीसी) जलवायु कार्रवाई से संबंधित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संधि है।

जलवायु परिवर्तन और डिजिटल प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रभाव के बीच संयुक्त राष्ट्र की ये नई पहलें पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। मीथेन उत्सर्जन में कमी और एआई उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयास वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Originally written on June 24, 2026 and last modified on June 24, 2026.

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