पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ बने अग्निकुल कॉसमॉस के बोर्ड पर्यवेक्षक

पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ बने अग्निकुल कॉसमॉस के बोर्ड पर्यवेक्षक

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ चेन्नई स्थित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी अग्निकुल कॉसमॉस के निदेशक मंडल में पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) के रूप में शामिल हो गए हैं। उन्होंने जनवरी 2022 से जनवरी 2025 तक इसरो के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में लगभग 40 वर्षों तक महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके इस नए दायित्व से भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को तकनीकी विशेषज्ञता और रणनीतिक मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है।

एस. सोमनाथ का अंतरिक्ष कार्यक्रम में योगदान

एस. सोमनाथ भारत के प्रमुख अंतरिक्ष वैज्ञानिकों में से एक हैं। उन्होंने इसरो में विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं का नेतृत्व किया और संगठन के अध्यक्ष के रूप में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगभग चार दशकों के अनुभव के साथ उन्होंने प्रक्षेपण यान विकास, अंतरिक्ष मिशनों की योजना और स्वदेशी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को मजबूत बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया। अब निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष कंपनी से जुड़ने से सरकारी और निजी अंतरिक्ष उद्योग के बीच सहयोग को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

अग्निकुल कॉसमॉस और अग्निबाण प्रक्षेपण यान

अग्निकुल कॉसमॉस तमिलनाडु के चेन्नई स्थित एक भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी है, जो छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए आधुनिक रॉकेट विकसित कर रही है। कंपनी का प्रक्षेपण यान अग्निबाण दो-चरणीय (टू-स्टेज) संरचना वाला रॉकेट है। इसमें पहला चरण प्रारंभिक उड़ान और ऊंचाई प्राप्त करने का कार्य करता है, जबकि दूसरा चरण उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचाने के लिए आवश्यक अतिरिक्त वेग प्रदान करता है।

मिशन 02 और बूस्टर रिकवरी

अग्निकुल कॉसमॉस का आगामी मिशन 02 भारत में पहली बार किसी कक्षीय श्रेणी के रॉकेट बूस्टर की रिकवरी का परीक्षण करेगा। इस मिशन में पहले चरण के बूस्टर को नियंत्रित तरीके से पृथ्वी की ओर वापस लाया जाएगा और उड़ान के बाद समुद्र से पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा। यदि यह परीक्षण सफल रहता है, तो पुनः उपयोग योग्य रॉकेट प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को नई मजबूती मिलेगी। इससे भविष्य में प्रक्षेपण लागत कम करने और अंतरिक्ष अभियानों को अधिक किफायती बनाने में सहायता मिल सकती है।

पेटेंट और तकनीकी नवाचार

अग्निबाण रॉकेट का ऊपरी चरण केवल उपग्रह प्रक्षेपण तक सीमित नहीं है। पेलोड को कक्षा में स्थापित करने के बाद भी यह कार्य करना जारी रख सकता है। इस परिवर्तनीय ऊपरी चरण संरचना को अंतरिक्ष में विभिन्न परिचालन कार्यों के लिए एक मंच के रूप में विकसित किया गया है। कंपनी ने इस तकनीक के लिए भारत, अमेरिका और यूरोप में पेटेंट प्राप्त किए हैं। अग्निकुल कॉसमॉस का अनुसंधान प्रक्षेपण यान डिजाइन, बूस्टर रिकवरी और कक्षा में संचालन जैसी उन्नत अंतरिक्ष तकनीकों पर केंद्रित है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • इसरो (आईएसआरओ) भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है।
  • कक्षीय श्रेणी का रॉकेट वह प्रक्षेपण यान होता है, जो पेलोड को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने में सक्षम होता है।
  • दो-चरणीय रॉकेट में पहला चरण प्रारंभिक प्रक्षेपण और दूसरा चरण अंतिम वेग प्रदान करता है।
  • बूस्टर रिकवरी का अर्थ प्रक्षेपण के बाद रॉकेट के पहले चरण को सुरक्षित रूप से वापस प्राप्त करना होता है।

एस. सोमनाथ का अग्निकुल कॉसमॉस से जुड़ना भारत के तेजी से विकसित हो रहे निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से उन्नत प्रक्षेपण तकनीकों, पुनः उपयोग योग्य रॉकेट प्रणालियों और अंतरिक्ष नवाचार को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे भारत वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।

Originally written on July 16, 2026 and last modified on July 16, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *