नीति आयोग ने जारी की ट्रेड वॉच क्वार्टरली की आठवीं रिपोर्ट
नीति आयोग ने 23 जून 2026 को नई दिल्ली में ‘ट्रेड वॉच क्वार्टरली’ का आठवां संस्करण जारी किया। यह रिपोर्ट वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) के दौरान भारत और वैश्विक व्यापार की स्थिति का विश्लेषण प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट में वस्तु एवं सेवा व्यापार, बाह्य क्षेत्र की स्थिति तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े प्रमुख रुझानों का विस्तृत आकलन किया गया है। इसके अलावा इस संस्करण में भारतीय औषधि उद्योग को विशेष विषय के रूप में शामिल किया गया है, जो देश की निर्यात क्षमता और स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है।
ट्रेड वॉच क्वार्टरली क्या है?
ट्रेड वॉच क्वार्टरली नीति आयोग का एक नियमित प्रकाशन है, जिसका उद्देश्य भारत के व्यापार प्रदर्शन और वैश्विक व्यापारिक गतिविधियों की निगरानी करना है। यह रिपोर्ट वस्तु व्यापार, सेवा व्यापार और बाह्य क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़ों और प्रवृत्तियों का विश्लेषण करती है। आठवां संस्करण विशेष रूप से वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही पर केंद्रित है। इसमें भारत के व्यापारिक प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के साथ-साथ उन चुनौतियों और अवसरों पर भी प्रकाश डाला गया है, जो वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होते हैं।
चौथी तिमाही में भारत का व्यापार प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार जनवरी-मार्च 2026 के दौरान भारत का कुल वस्तु और सेवा व्यापार वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 5.4 प्रतिशत बढ़कर 1.84 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। यह वृद्धि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की व्यापारिक क्षमता को दर्शाती है। विशेष रूप से सेवा क्षेत्र ने बेहतर प्रदर्शन किया। सेवा निर्यात में 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो आयात वृद्धि से अधिक रही। इसके परिणामस्वरूप भारत ने इस अवधि में सेवा क्षेत्र में अधिशेष बनाए रखा। यह दर्शाता है कि सूचना प्रौद्योगिकी, व्यवसायिक सेवाओं और अन्य सेवा क्षेत्रों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत बनी हुई है।
औषधि क्षेत्र पर विशेष फोकस
ट्रेड वॉच क्वार्टरली के इस संस्करण में औषधि उद्योग को विशेष विषय के रूप में शामिल किया गया है। भारत का फार्मास्युटिकल क्षेत्र विश्व स्तर पर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के लिए जाना जाता है और यह देश के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में से एक है। यह उद्योग न केवल विदेशी मुद्रा अर्जित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में भी योगदान देता है। दवाओं और टीकों के उत्पादन में भारत की मजबूत स्थिति ने उसे विश्व के प्रमुख फार्मा निर्यातकों में शामिल किया है।
बाह्य क्षेत्र और व्यापार विविधीकरण
रिपोर्ट में भारत के बाह्य क्षेत्र को मजबूत और लचीला बताया गया है। पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट को एक अस्थायी आपूर्ति झटका माना गया है, जिसने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित किया। इसके संदर्भ में रिपोर्ट ने आयात स्रोतों और निर्यात बाजारों के विविधीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया है। व्यापार विविधीकरण से किसी एक क्षेत्र या देश पर निर्भरता कम होती है और आपूर्ति बाधाओं के दौरान अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलती है। नीति आयोग का मानना है कि भारत को नए बाजारों और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश जारी रखनी चाहिए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ट्रेड वॉच क्वार्टरली नीति आयोग का एक नियमित प्रकाशन है जो भारत के व्यापार और बाह्य क्षेत्र का विश्लेषण करता है।
- वर्ष 2025 में भारत दुनिया का आठवां सबसे बड़ा सेवा निर्यातक देश बना रहा।
- वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में भारत का कुल वस्तु एवं सेवा व्यापार 1.84 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
- सेवा निर्यात में 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे सेवा क्षेत्र में अधिशेष बना रहा।
- पश्चिम एशिया संकट को भारत के व्यापार विविधीकरण के संदर्भ में एक अस्थायी आपूर्ति झटका बताया गया है।
नीति आयोग की यह रिपोर्ट दर्शाती है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का व्यापारिक क्षेत्र मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। सेवा निर्यात की निरंतर वृद्धि, औषधि उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और व्यापार विविधीकरण की रणनीति भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।