सौश्रुतम् 2026 का शुभारंभ, आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा पर वैश्विक मंथन शुरू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 15 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) में सौश्रुतम् 2026 का उद्घाटन किया। आयुष मंत्रालय द्वारा आयोजित यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 15 से 17 जुलाई 2026 तक आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन सुश्रुत जयंती के अवसर पर किया गया, जबकि 14 जुलाई 2026 को पूर्व-सम्मेलन कार्यशाला का आयोजन भी हुआ। इस संगोष्ठी का उद्देश्य आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा, वैज्ञानिक अनुसंधान और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना था।
सौश्रुतम् 2026 का उद्देश्य
सौश्रुतम् 2026 आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा पर केंद्रित एक अंतरराष्ट्रीय मंच है, जहां देश-विदेश के विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भाग लिया। सम्मेलन में साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद, आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान, शल्य चिकित्सा पद्धतियों तथा संस्थागत सहयोग जैसे विषयों पर विशेष चर्चा की गई। इस आयोजन का उद्देश्य आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ना तथा चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और उपचार पद्धतियों को मजबूत करना है।
सुश्रुत और आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा
आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा का संबंध प्राचीन भारतीय चिकित्सक सुश्रुत से माना जाता है, जिन्हें भारतीय चिकित्सा इतिहास में शल्य चिकित्सा का अग्रदूत माना जाता है। उनकी प्रसिद्ध कृति सुश्रुत संहिता आयुर्वेद के प्रमुख शास्त्रीय ग्रंथों में से एक है, जिसमें शल्य चिकित्सा, शरीर रचना, रोग निदान और उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई है। सुश्रुत जयंती प्रत्येक वर्ष उनके योगदान को स्मरण करने के लिए मनाई जाती है। इस अवसर पर देशभर में आयुर्वेद, चिकित्सा शिक्षा और शोध से जुड़े विभिन्न शैक्षणिक एवं संस्थागत कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
संस्थागत और चिकित्सीय पहल
संगोष्ठी के दौरान एआईआईए में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित 3 टेस्ला एमआरआई सुविधा का भी उद्घाटन किया गया। यह उच्च क्षमता वाली आधुनिक इमेजिंग प्रणाली जटिल रोगों के सटीक निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग द्वारा तैयार आयुर्वेद की महिला स्नातकों के करियर से संबंधित अध्ययन भी जारी किया। इस अध्ययन में आयुर्वेद क्षेत्र में महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और पेशेवर विकास के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण किया गया है। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि विशेष प्रशिक्षण प्राप्त आयुर्वेद स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को 58 प्रकार की शल्य चिकित्सा करने की अनुमति है। इनमें 39 सामान्य शल्य क्रियाएं तथा 19 नेत्र, कान-नाक-गला और दंत शल्य प्रक्रियाएं शामिल हैं।
आयुर्वेद और चिकित्सा पर्यटन
हाल के वर्षों में आयुर्वेद आधारित उपचारों का उपयोग चिकित्सा पर्यटन में भी तेजी से बढ़ा है। विशेष रूप से बाल प्रत्यारोपण और दंत प्रत्यारोपण जैसी आधुनिक चिकित्सा प्रक्रियाओं के बाद रोगियों के पुनर्वास, तनाव कम करने और स्वास्थ्य लाभ में आयुर्वेदिक उपचारों का सहायक रूप से उपयोग बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी जून 2026 में वाराणसी में आयोजित सुश्रुत कॉन-2026 के बाद आयुर्वेद अस्पतालों में आधुनिक उपकरण और उन्नत संसाधन उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, जिससे आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जा सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सुश्रुत को भारतीय चिकित्सा इतिहास में शल्य चिकित्सा का अग्रदूत माना जाता है।
- सुश्रुत संहिता आयुर्वेद का प्रमुख शास्त्रीय ग्रंथ है, जिसमें शल्य चिकित्सा का विस्तृत वर्णन मिलता है।
- अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) आयुष मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- 3 टेस्ला एमआरआई उच्च क्षमता वाली चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग प्रणाली है, जिसका उपयोग उन्नत चिकित्सीय जांच में किया जाता है।
सौश्रुतम् 2026 आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा, अनुसंधान और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजन आयुर्वेद की वैज्ञानिक विश्वसनीयता को मजबूत करने, चिकित्सा शिक्षा को आधुनिक बनाने और भारत को पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।