संगीत नाटक अकादमी सम्मान: 2024-25 के लिए 115 कलाकारों का चयन
संगीत, नृत्य और नाट्य की दुनिया के लिए बड़ी खबर है। संगीत नाटक अकादमी ने 2024 और 2025 चक्र के लिए अपने सर्वोच्च सम्मान अकादमी फेलोशिप, अकादमी पुरस्कार और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार की घोषणा कर दी है। इन सम्मानों के लिए कुल 7 फेलो, 108 अकादमी पुरस्कार विजेता और 106 युवा कलाकार चुने गए हैं।
अकादमी के सर्वोच्च सम्मान और उनकी अहमियत
संगीत नाटक अकादमी भारत की राष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाट्य अकादमी है, जो संस्कृति मंत्रालय के अधीन काम करती है। यह संस्था प्रदर्शन कलाओं के कलाकारों और विद्वानों को मान्यता देती है। अकादमी फेलोशिप को संस्थान का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है और इसे अकादमी रत्न भी कहा जाता है। इसके बाद अकादमी पुरस्कार, यानी अकादमी पुरस्कार/अकादमी पुरस्कर, दिए जाते हैं। युवा कलाकारों के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन है।
किन कलाकारों को मिला सम्मान
इस बार चुने गए सात अकादमी फेलो हैं: रंगलाल बरेथ, ए. वी. आनंद, रीता गांगुली, पुरु दाधीच, चित्तरंजन ज्योतिषी, पासुमार्थी रत्तैया शार्मा और सुधारानी रघुपथी। 2024 के संगीत पुरस्कारों में अरुण नागेश काशलकर, निर्मल्या डे, भारत भूषण गोस्वामी, संजय मुखर्जी, कृष्णा वीगेश और राकेश चौरसिया शामिल हैं। नृत्य श्रेणी में रजेश्वरी साईनाथ, बिपुल चंद्र दास, राजकुमारी थम्बालसाना देवी, वीणा मूर्ति विजय, बिचित्रानंद स्वैन, प्रेमा ओझा बोर्बयान और श्रीदेवी राजन को सम्मानित किया गया है।
समारोह और चयन प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी
अकादमी की जनरल काउंसिल ने इन नामों का चयन किया है। 2024 और 2025 के दोनों चक्रों को मिलाकर 115 कलाकारों को निवेश समारोह में सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 13 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में एक विशेष समारोह में ये पुरस्कार प्रदान करेंगी। इसी समारोह में असम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, त्रिपुरा, मणिपुर और नागालैंड के 10 चयनित कलाकारों को भी राष्ट्रीय सम्मान दिए जाएंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संगीत नाटक अकादमी की स्थापना 1953 में हुई थी।
- यह भारत की राष्ट्रीय अकादमी है, जो संगीत, नृत्य और नाट्य से जुड़ी है।
- अकादमी रत्न, संगीत नाटक अकादमी का सर्वोच्च सम्मान है।
- उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार युवा प्रदर्शनकारी कलाकारों के लिए दिया जाता है।
इन सम्मानों के जरिए भारत की शास्त्रीय, लोक और अन्य प्रदर्शन कलाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है। यह घोषणा उन कलाकारों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिनका योगदान लंबे समय से भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को समृद्ध करता रहा है।