ग्रामीण युवाओं के लिए DDU-GKY 2.0 से कौशल और रोजगार का नया ढांचा
ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जोड़ने वाली दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना 2.0 अब अधिक व्यापक और परिणाम-आधारित स्वरूप में लागू की जा रही है। मई 2025 में जारी संशोधित दिशानिर्देशों के बाद इस योजना में प्रशिक्षण के साथ-साथ प्लेसमेंट, नौकरी के बाद सहायता और रोजगार की निरंतरता पर अधिक जोर दिया गया है।
योजना का नया स्वरूप और उद्देश्य
दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना मूल रूप से 2014-15 में ग्रामीण युवाओं के लिए प्लेसमेंट-लिंक्ड कौशल विकास कार्यक्रम के रूप में शुरू की गई थी। 2.0 संस्करण में प्रशिक्षण को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाया गया है, ताकि ग्रामीण युवाओं को केवल कौशल ही नहीं, बल्कि स्थायी रोजगार भी मिल सके।
संशोधित ढांचे के तहत प्लेसमेंट सहायता की अवधि छह महीने कर दी गई है। इसके साथ ही 12 महीने तक पोस्ट-प्लेसमेंट ट्रैकिंग का प्रावधान जोड़ा गया है, जिससे यह देखा जा सके कि प्रशिक्षित युवा नौकरी में टिके रह रहे हैं या नहीं। योजना में छह महीने की अवधि के लिए ₹7,620 की वित्तीय सहायता और 365 दिन तक रोजगार में बने रहने वाले उम्मीदवारों के लिए ₹5,000 की रिटेंशन सहायता भी शामिल है।
कौन चला रहा है और कहां तक पहुंची योजना
इस योजना का क्रियान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय के माध्यम से किया जा रहा है। सितंबर 2026 तक DDU-GKY 2.0 को 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत 749 से अधिक स्वीकृत परियोजनाएं, 760 से अधिक सक्रिय प्रशिक्षण केंद्र और 455 से अधिक परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियां काम कर रही हैं।
केंद्र सरकार ने 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए ₹750 करोड़ का आवंटन किया है। यह संकेत देता है कि ग्रामीण रोजगार और कौशल विकास को नीति स्तर पर अभी भी प्राथमिकता दी जा रही है।
कौन-से क्षेत्र और विशेष घटक शामिल हैं
नए ढांचे में प्रशिक्षण को ऐसे क्षेत्रों से जोड़ा गया है जिनमें रोजगार की संभावनाएं अधिक हैं। इनमें एयरोस्पेस और एविएशन, कृषि, ब्यूटी एंड वेलनेस, ग्रीन जॉब्स और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर शामिल हैं। इसके साथ ही योजना में एंड-टू-एंड डिजिटल सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है, जिससे प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और रोजगार ट्रैकिंग की निगरानी अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हो सके।
योजना के भीतर दो विशेष घटक भी महत्वपूर्ण हैं। रोशनी कार्यक्रम वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों के लिए है, जबकि हिमायत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए विशेष रूप से लागू किया गया है। इन घटकों का उद्देश्य उन क्षेत्रों के युवाओं को मुख्यधारा के रोजगार अवसरों से जोड़ना है, जहां सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां अधिक हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- DDU-GKY ग्रामीण विकास मंत्रालय की प्लेसमेंट-लिंक्ड स्किल डेवलपमेंट योजना है।
- इसके 2.0 संस्करण के संशोधित दिशानिर्देश मई 2025 में अधिसूचित किए गए।
- योजना में छह महीने की प्लेसमेंट सहायता और 12 महीने की पोस्ट-प्लेसमेंट ट्रैकिंग का प्रावधान है।
- रोशनी और हिमायत, DDU-GKY 2.0 के विशेष घटक हैं।
मंत्रालय की योजना अक्टूबर 2026 से प्रशिक्षण का पहला बड़ा चरण शुरू करने की है। 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 34,000 से अधिक ग्रामीण युवाओं को 1,164 बैचों में प्रशिक्षण दिया जाना प्रस्तावित है, जबकि इन क्षेत्रों के लिए 31 दिसंबर 2027 तक 3,57,112 युवाओं का लक्ष्य तय किया गया है।
इसके साथ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों के माध्यम से Migration Support Centres भी स्थापित किए जा रहे हैं, जहां आवास, परामर्श और प्लेसमेंट सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।