पीबी-शब्द की मुफ्त खबर सेवा 2027 तक बढ़ी
प्रसार भारती ने अपनी मल्टीमीडिया न्यूज फीड सेवा पीबी-शब्द की मुफ्त पहुंच मार्च 2027 तक बढ़ा दी है। यह सेवा भारत की पंजीकृत मीडिया संस्थाओं को टेक्स्ट, वीडियो, ऑडियो, फोटो और इन्फोग्राफिक्स के रूप में तैयार खबरें उपलब्ध कराती है।
पीबी-शब्द क्या है और क्यों अहम है
पीबी-शब्द का पूरा नाम Prasar Bharati – Shared Audio-Visuals for Broadcast and Dissemination है। इसे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 13 मार्च 2024 को नई दिल्ली में लॉन्च किया था। यह प्लेटफॉर्म खास तौर पर मीडिया संस्थानों के लिए बनाया गया है, ताकि उन्हें विश्वसनीय और उपयोग के लिए तैयार समाचार सामग्री एक ही जगह मिल सके।
इस सेवा के जरिए समाचार संगठनों को राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय घटनाओं पर तेज़ी से सामग्री मिलती है। प्लेटफॉर्म 15 भारतीय भाषाओं में कंटेंट देता है और लगभग 50 समाचार श्रेणियों को कवर करता है।
कितनी सामग्री और किस तरह की सुविधा
पीबी-शब्द पर रोज़ाना 1,000 से अधिक खबरें उपलब्ध कराई जाती हैं। इसकी एक खास बात यह है कि सामग्री लोगो-फ्री होती है और पंजीकृत मीडिया संस्थानों को इसका उपयोग करने पर क्रेडिट देने की आवश्यकता नहीं होती। इससे अखबारों, टीवी चैनलों, रेडियो और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए खबरों का इस्तेमाल आसान हो जाता है।
इस सेवा के पीछे 1,500 से अधिक रिपोर्टर, संवाददाता और स्ट्रिंगर का नेटवर्क काम करता है। इनके साथ 60 समर्पित 24×7 संपादकीय डेस्क भी जुड़े हैं, जो खबरों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।
लाइव फीड और आर्काइव से क्या लाभ
पीबी-शब्द में राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों, अलंकरण समारोहों और प्रेस ब्रीफिंग्स के लिए लाइव फीड की सुविधा भी है। इसके अलावा, इसमें एक आर्काइव लाइब्रेरी भी दी गई है, जहां संग्रहीत समाचार सामग्री और संदर्भ सामग्री उपलब्ध रहती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रसार भारती भारत का सार्वजनिक सेवा प्रसारक है और यह ऑल इंडिया रेडियो तथा दूरदर्शन का संचालन करता है।
- पीबी-शब्द का पूरा नाम Prasar Bharati – Shared Audio-Visuals for Broadcast and Dissemination है।
- यह प्लेटफॉर्म 13 मार्च 2024 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा लॉन्च किया गया था।
- पंजीकृत समाचारपत्र, पत्रिकाएं, जर्नल, टीवी चैनल, रेडियो स्टेशन और डिजिटल प्रकाशक shabd.prasarbharati.org पर मुफ्त पंजीकरण कर सकते हैं।
मुफ्त पहुंच को 2027 तक बढ़ाना छोटे और बड़े, दोनों तरह के मीडिया संस्थानों के लिए उपयोगी कदम है। इससे भरोसेमंद, बहुभाषी और तैयार-उपयोग सामग्री तक पहुंच और आसान हो जाएगी।