तूलॉन में वरुणा अभ्यास से भारत-फ्रांस नौसैनिक साझेदारी को नई मजबूती

तूलॉन में वरुणा अभ्यास से भारत-फ्रांस नौसैनिक साझेदारी को नई मजबूती

भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल (F43) 22 सितंबर 2026 को फ्रांस के तूलॉन नौसैनिक अड्डे पर पहुंचा, जहां भारत-फ्रांस द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास वरुणा का 24वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है। यह अभ्यास दोनों देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में बढ़ती रक्षा साझेदारी और परिचालन तालमेल का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।

वरुणा अभ्यास क्यों अहम है

वरुणा भारत और फ्रांस की नौसेनाओं के बीच होने वाला नियमित द्विपक्षीय अभ्यास है, जिसमें बंदरगाह चरण और समुद्री चरण दोनों शामिल होते हैं। इसके दौरान क्रॉस-डेक विजिट, पेशेवर संवाद, समुद्री संचालन से जुड़े अभ्यास और खेलकूद गतिविधियां भी होती हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि दोनों नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, यानी साथ मिलकर काम करने की क्षमता को मजबूत करना है।

इस अभ्यास की शुरुआत 1983 में हुई थी, जबकि “वरुणा” नाम 2001 में अपनाया गया। समय के साथ यह अभ्यास भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग का एक स्थायी और भरोसेमंद मंच बन गया है।

आईएनएस त्रिशूल की भूमिका और आधुनिक क्षमता

आईएनएस त्रिशूल भारतीय नौसेना का एक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है, जिसका पेनेंट नंबर F43 है। हाल के वर्षों में इस पोत में कई बड़े उन्नयन किए गए हैं। इनमें पुराने रूसी प्रणालियों को हटाकर आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिससे इसकी युद्धक क्षमता और निगरानी क्षमता दोनों में सुधार हुआ है।

जहाज पर मौजूद प्रमुख आधुनिक प्रणालियों में BrahMos-capable UVLM, Atlas Elektronik ACTAS स्टर्न-माउंटेड सोनार और नया एंटी-टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम शामिल हैं। ये प्रणालियां सतही युद्ध, पानी के भीतर लक्ष्य पहचान और टॉरपीडो से बचाव जैसी क्षमताओं से जुड़ी हैं। ACTAS का पूरा नाम Active Towed Array Sonar है, जो पानी के भीतर वस्तुओं की पहचान में मदद करता है।

भारत-फ्रांस समुद्री सहयोग का व्यापक संदर्भ

भारत और फ्रांस हिंद महासागर से लेकर भूमध्यसागर तक नियमित नौसैनिक अभ्यास करते रहे हैं। फ्रांस का तूलॉन बंदरगाह भूमध्यसागर तट पर स्थित एक प्रमुख नौसैनिक अड्डा है और फ्रांसीसी नौसैनिक संचालन का अहम केंद्र माना जाता है। ऐसे अभ्यासों में संचार अभ्यास, सामरिक युद्धाभ्यास और संयुक्त संचालन की तैयारी शामिल होती है।

यह सहयोग केवल एक अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापक रक्षा संबंधों का हिस्सा है। समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भी यह साझेदारी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • वरुणा भारत-फ्रांस नौसैनिक अभ्यास का नाम 2001 में अपनाया गया था।
  • इस अभ्यास की शुरुआत 1983 में हुई थी।
  • आईएनएस त्रिशूल भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है और इसका पेनेंट नंबर F43 है।
  • ACTAS का अर्थ Active Towed Array Sonar है, जो पानी के भीतर लक्ष्य पहचानने में उपयोगी होता है।

तूलॉन में आईएनएस त्रिशूल की मौजूदगी यह दिखाती है कि भारत और फ्रांस समुद्री सुरक्षा, तकनीकी तालमेल और संयुक्त परिचालन क्षमता को लगातार मजबूत कर रहे हैं। वरुणा जैसे अभ्यास दोनों नौसेनाओं को वास्तविक परिस्थितियों के लिए बेहतर तैयार करते हैं।

Originally written on September 24, 2026 and last modified on September 24, 2026.

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