न्यूक्लियर वैज्ञानिक और जन-विज्ञान के पुरोधा एम.पी. परमेश्वरन का निधन
प्रख्यात परमाणु वैज्ञानिक, विज्ञान संचारक और मार्क्सवादी विचारक एम.पी. परमेश्वरन का 11 अगस्त 2026 को केरल के त्रिशूर स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वे 92 वर्ष के थे। विज्ञान, भाषा और जन-आंदोलनों के बीच सेतु बनाने वाले परमेश्वरन ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में शोध, लोकप्रिय विज्ञान और सामाजिक चेतना—तीनों क्षेत्रों में अलग पहचान बनाई।
वैज्ञानिक करियर से जन-आंदोलन तक
18 जनवरी 1935 को त्रिशूर जिले के किरालूर में जन्मे परमेश्वरन ने तिरुवनंतपुरम के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने 1965 में मॉस्को पावर इंस्टीट्यूट से न्यूक्लियर इंजीनियरिंग में पीएचडी हासिल की। 1957 से 1975 तक वे मुंबई स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में कार्यरत रहे। यह संस्थान भारत के प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्रों में गिना जाता है।
1975 में उन्होंने इस केंद्र से इस्तीफा देकर विज्ञान के लोकप्रियकरण, जन-शिक्षा और जमीनी स्तर के सामाजिक कार्यों को अपना मुख्य क्षेत्र बनाया। यह बदलाव उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है, क्योंकि इसके बाद उनका काम प्रयोगशाला से निकलकर सीधे समाज तक पहुंचा।
विज्ञान संचार और भाषा के क्षेत्र में योगदान
1975 के बाद परमेश्वरन केरल शास्त्र साहित्य परिषद से जुड़े और आगे चलकर ऑल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क की स्थापना में भी भूमिका निभाई। उन्होंने विज्ञान को आम लोगों की भाषा में समझाने पर जोर दिया और स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक पहलों को बढ़ावा दिया। स्मोकलेस स्टोव के प्रचार में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा, जो स्वच्छ और किफायती घरेलू तकनीक के रूप में चर्चा में रहा।
भाषा और तकनीक के क्षेत्र में भी उनका योगदान याद किया जाता है। 1969 से 1973 के बीच उन्होंने केरल के स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ लैंग्वेजेज में सहायक निदेशक के रूप में प्रतिनियुक्ति पर काम किया और मलयालम टाइपराइटर की कीबोर्ड लेआउट डिजाइन करने में मदद की। यह कार्य केरल में भाषा प्रौद्योगिकी के विकास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
राजनीतिक जीवन, सम्मान और विरासत
परमेश्वरन लंबे समय तक कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) से जुड़े रहे, लेकिन 2004 में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इसके बावजूद वे वैचारिक बहसों और जन-आंदोलनों में सक्रिय बने रहे। 2022 में उन्हें केरल सरकार का केरल श्री पुरस्कार मिला, जो राज्य का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र मुंबई स्थित भारत का प्रमुख परमाणु अनुसंधान संस्थान है।
- मॉस्को पावर इंस्टीट्यूट रूस का उच्च शिक्षण संस्थान है, जो इंजीनियरिंग और पावर स्टडीज से जुड़ा है।
- केरल श्री पुरस्कार केरल का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
- मलयालम टाइपराइटर कीबोर्ड लेआउट भाषा प्रौद्योगिकी और लिपि विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण उदाहरण है।
एम.पी. परमेश्वरन का जीवन इस बात का उदाहरण रहा कि वैज्ञानिक सोच केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह समाज, भाषा और जन-जीवन को भी बदलने की क्षमता रखती है।