मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स पर नई मैपिंग से उम्र के साथ जीन गतिविधि का खुलासा

मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स पर नई मैपिंग से उम्र के साथ जीन गतिविधि का खुलासा

वैज्ञानिकों ने मानव मस्तिष्क के डॉर्सोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स में जीवनभर बदलने वाली जीन गतिविधि का विस्तृत मानचित्र तैयार किया है। यह अध्ययन बताता है कि बचपन से लेकर वृद्धावस्था तक इस क्षेत्र में कोशिकीय और आनुवंशिक स्तर पर किस तरह बदलाव होते हैं, और यह बदलाव सोचने, योजना बनाने, निर्णय लेने तथा संज्ञानात्मक नियंत्रण जैसी क्षमताओं से कैसे जुड़े हैं।

क्या है यह मस्तिष्क क्षेत्र और क्यों है अहम

डॉर्सोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स मस्तिष्क के फ्रंटल लोब का हिस्सा है। यह वही क्षेत्र है जो कार्यकारी क्षमताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें कार्यशील स्मृति, योजना बनाना, निर्णय लेना और ध्यान को नियंत्रित करना जैसी प्रक्रियाएँ शामिल हैं। अध्ययन के अनुसार यह क्षेत्र बचपन और किशोरावस्था में विकसित होता है और वयस्कता में इसकी कोशिकीय संरचना काफी हद तक परिपक्व हो जाती है।

इस शोध में 1,494 मृत दाताओं से लिए गए मस्तिष्क-नाभिकों का विश्लेषण किया गया, जिनकी उम्र शैशवावस्था से 108 वर्ष तक थी। कुल मिलाकर 63 लाख से अधिक मस्तिष्क कोशिकाओं के जीन-गतिविधि पैटर्न को समझा गया। खास बात यह रही कि अध्ययन में उन दाताओं को भी शामिल किया गया जिनमें अल्जाइमर, पार्किंसन, लेवी बॉडी डिमेंशिया, वास्कुलर डिमेंशिया, सिज़ोफ्रेनिया और बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी स्थितियाँ थीं, और ऐसे लोग भी शामिल थे जिनमें कोई निदानित मस्तिष्क रोग नहीं था।

जीवनभर जीन गतिविधि में तीन चरण

शोधकर्ताओं ने प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स में जीन अभिव्यक्ति के तीन बड़े चरण पहचाने। पहला चरण वयस्कता से पहले तेज बदलावों का था, जब मस्तिष्क तेजी से परिपक्व होता है। दूसरा चरण प्रारंभिक और मध्य वयस्कता में अपेक्षाकृत स्थिरता का दिखा, यानी इस दौरान कोशिकीय गतिविधि में बड़े उतार-चढ़ाव कम रहे। तीसरा चरण जीवन के बाद के वर्षों में फिर से बदलावों का था, खासकर ग्लियल सपोर्ट कोशिकाओं और प्रतिरक्षा कोशिकाओं में।

अध्ययन के अनुसार प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की परिपक्वता लगभग 24 वर्ष की आयु तक काफी हद तक पूरी हो जाती है। यह निष्कर्ष इस धारणा को मजबूत करता है कि मस्तिष्क का यह हिस्सा लंबे समय तक विकसित होता रहता है और युवा वयस्कता तक पूरी तरह स्थिर नहीं होता।

शोध का महत्व और सार्वजनिक डेटा की भूमिका

यह अध्ययन Nature में 23 सितंबर 2026 को आठ सहयोगी अध्ययनों के साथ प्रकाशित हुआ। इसमें विविध आनुवंशिक पृष्ठभूमि वाले दाताओं के नमूने शामिल किए गए, जिससे मानव मस्तिष्क की विविधता को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली। शोध PsychAD कंसोर्टियम के माध्यम से किया गया और इसे अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग का समर्थन मिला, जो नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ का हिस्सा है।

इस परियोजना की एक बड़ी उपयोगिता यह है कि इसके सभी डेटा और विधियाँ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई गई हैं। इससे मस्तिष्क की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया, न्यूरोडीजेनेरेशन और मानसिक रोगों पर आगे के शोध को गति मिल सकती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स मस्तिष्क के फ्रंटल लोब का हिस्सा होता है और उच्च स्तरीय सोच से जुड़ा है।
  • ग्लियल कोशिकाओं में मुख्य रूप से एस्ट्रोसाइट्स, ऑलिगोडेंड्रोसाइट्स और माइक्रोग्लिया शामिल होती हैं।
  • लेवी बॉडी डिमेंशिया में मस्तिष्क में असामान्य अल्फा-साइन्यूक्लिन प्रोटीन जमाव देखा जाता है।
  • अध्ययन में 6.3 मिलियन से अधिक मस्तिष्क कोशिकाओं के नाभिकों का विश्लेषण किया गया।

यह शोध दिखाता है कि मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली उम्र के साथ एक सीधी रेखा में नहीं बदलती, बल्कि उसमें विकास, स्थिरता और पुनः परिवर्तन के अलग-अलग चरण होते हैं। यही समझ भविष्य में मस्तिष्क रोगों की पहचान और उपचार रणनीतियों को अधिक सटीक बनाने में मदद कर सकती है।

Originally written on September 24, 2026 and last modified on September 24, 2026.

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