दीपक धर को 2026 दिराक पदक, भारतीय विज्ञान की वैश्विक पहचान और मजबूत हुई

दीपक धर को 2026 दिराक पदक, भारतीय विज्ञान की वैश्विक पहचान और मजबूत हुई

भारतीय भौतिक विज्ञानी दीपक धर को 2026 का दिराक पदक देने की घोषणा 8 अगस्त 2026 को इटली के त्रिएस्ते स्थित अब्दुस सलाम इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स (ICTP) ने की। यह सम्मान उन्हें फ्रांस के बर्नार्ड डेरीडा, इटली के मार्क मेज़ार्ड और इज़राइल-अमेरिका के हैम सोम्पोलिंस्की के साथ संयुक्त रूप से मिला। यह उपलब्धि भारतीय सैद्धांतिक भौतिकी की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और मजबूत करती है।

दिराक पदक क्यों खास माना जाता है

दिराक पदक की स्थापना 1985 में ICTP ने की थी और यह हर साल 8 अगस्त को दिया जाता है, जो महान सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी पॉल दिराक की जयंती है। यह पुरस्कार सैद्धांतिक भौतिकी में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। पदक के साथ 5,000 अमेरिकी डॉलर की राशि भी दी जाती है। खास बात यह है कि यह सम्मान उन वैज्ञानिकों को नहीं दिया जाता जो पहले नोबेल पुरस्कार, फील्ड्स मेडल या वुल्फ पुरस्कार प्राप्त कर चुके हों।

दीपक धर का शोध और वैज्ञानिक योगदान

दीपक धर का नाम सांख्यिकीय यांत्रिकी के क्षेत्र में विशेष रूप से सम्मान के साथ लिया जाता है। यह भौतिकी की वह शाखा है जो बहुत अधिक कणों वाले तंत्रों के व्यवहार को प्रायिकता के आधार पर समझती है। इसमें संतुलन और असंतुलन अवस्थाएँ, अवस्था परिवर्तन और पदार्थ के सामूहिक व्यवहार जैसे विषय शामिल होते हैं। 2026 के लिए जारी प्रशस्ति में उनके योगदान को संतुलन और असंतुलन सांख्यिकीय यांत्रिकी, अनुकूलन, सैद्धांतिक तंत्रिका विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जोड़ा गया। दीपक धर का शोध विशेष रूप से सैंडपाइल मॉडल के लिए जाना जाता है। यह मॉडल जटिल प्रणालियों में स्व-संगठित नाजुकता को समझने में उपयोगी माना जाता है। उनके काम ने भौतिकी के साथ-साथ जटिल प्रणालियों के अध्ययन को भी नई दिशा दी है।

शैक्षणिक सफर और पहले मिले सम्मान

दीपक धर ने 1970 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री ली, 1972 में आईआईटी कानपुर से एमएससी किया और 1978 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पीएचडी प्राप्त की। कैलटेक में उन्होंने रिचर्ड फाइनमैन के साथ शिक्षण सहायक के रूप में भी काम किया था। उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों को पहले भी कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2022 में वे बोल्ट्ज़मैन पदक पाने वाले पहले भारतीय बने थे। इसके बाद 2023 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया, जो भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • दिराक पदक की शुरुआत 1985 में ICTP, त्रिएस्ते ने की थी।
  • यह पुरस्कार हर साल 8 अगस्त को पॉल दिराक की जयंती पर दिया जाता है।
  • पॉल दिराक ब्रिटिश सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी थे और क्वांटम यांत्रिकी के संस्थापकों में गिने जाते हैं।
  • दीपक धर 2022 में बोल्ट्ज़मैन पदक पाने वाले पहले भारतीय बने थे।

दीपक धर को मिला यह सम्मान भारतीय विज्ञान समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह दिखाता है कि भारतीय शोधकर्ता सैद्धांतिक भौतिकी जैसे अत्यंत जटिल क्षेत्रों में भी वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

Originally written on August 10, 2026 and last modified on August 10, 2026.

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