वैज्ञानिकों ने खोजा ईंधन बचाने वाला नया पृथ्वी-चंद्र मार्ग

वैज्ञानिकों ने खोजा ईंधन बचाने वाला नया पृथ्वी-चंद्र मार्ग

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने अप्रैल 2026 में जर्नल “Astrodynamics” में पृथ्वी से चंद्रमा तक पहुंचने के लिए कम ईंधन खर्च करने वाले नए अंतरिक्ष मार्ग पर शोध प्रकाशित किया। इस अध्ययन में ब्राजील के University of São Paulo और पुर्तगाल के University of Coimbra के वैज्ञानिक शामिल थे। शोध के प्रमुख लेखक एलन कार्देक डी अल्मेडा जूनियर थे, जबकि विटोर मार्टिंस डी ओलिवेरा सह-लेखक रहे।

पृथ्वी से चंद्रमा तक की ट्राजेक्टरी

पृथ्वी से चंद्रमा तक यात्रा के लिए अंतरिक्ष यानों को विशेष transfer trajectories का उपयोग करना पड़ता है। इन मार्गों की गणना orbital mechanics और गुरुत्वाकर्षण बलों के आधार पर की जाती है। नए शोध में खोजे गए मार्ग से spacecraft manoeuvre के लिए आवश्यक delta-v में कम से कम 58.8 मीटर प्रति सेकंड की कमी आती है। कम delta-v का अर्थ है कम ईंधन की आवश्यकता, जिससे मिशन अधिक किफायती बन सकता है।

गुरुत्वाकर्षण आधारित अंतरिक्ष नेविगेशन

यह नया मार्ग पृथ्वी और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण प्रभावों का उपयोग करता है। यह Interplanetary Transportation Network से जुड़े मार्गों पर आधारित है। यह पथ चंद्रमा के दूर वाले हिस्से यानी far side से होकर गुजरता है और Earth-Moon प्रणाली के L1 Lagrange point के आसपास की कक्षाओं का उपयोग करता है। L1 वह बिंदु है, जहां पृथ्वी और चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण संतुलन में होता है। इस प्रकार की low-energy transfer तकनीक का उपयोग पहले जापान के Hiten probe और NASA के GRAIL मिशन में भी किया जा चुका है।

उन्नत कंप्यूटर मॉडलिंग का उपयोग

वैज्ञानिकों ने लगभग 3 करोड़ संभावित मार्गों का कंप्यूटर मॉडलिंग के जरिए अध्ययन किया और करीब 2.8 लाख मामलों का विश्लेषण किया। इसके लिए theory of functional connections का उपयोग किया गया। इस नए मार्ग की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसमें spacecraft का पृथ्वी से लगातार संपर्क बना रहता है। सामान्यतः जब अंतरिक्ष यान चंद्रमा के पीछे जाता है, तो signal blackout की स्थिति बन जाती है, लेकिन इस मार्ग में ऐसी समस्या नहीं आती।

भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों में उपयोग

यह यात्रा लगभग 32 दिनों में पूरी होती है, इसलिए इसे तत्काल मानव मिशनों की बजाय cargo missions के लिए अधिक उपयुक्त माना जा रहा है। भविष्य में वैज्ञानिक इस मॉडल में सूर्य के गुरुत्वाकर्षण को भी शामिल करने की योजना बना रहे हैं, ताकि और अधिक कुशल तथा ऊर्जा बचाने वाले मार्ग खोजे जा सकें।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • Delta-v अंतरिक्ष यान की गति में आवश्यक परिवर्तन को दर्शाता है।
  • L1 Lagrange point पृथ्वी-चंद्रमा प्रणाली के पांच संतुलन बिंदुओं में से एक है।
  • जापान का Hiten probe वर्ष 1990 में लॉन्च किया गया था।
  • NASA का GRAIL मिशन चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र का अध्ययन करने के लिए भेजा गया था।

यह नया शोध भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को अधिक सस्ता और ऊर्जा-कुशल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे चंद्र मिशनों और अंतरिक्ष परिवहन तकनीकों में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।

Originally written on May 25, 2026 and last modified on May 25, 2026.

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