लोकटक प्रोटोक्लस्टर की खोज ने खोले प्रारंभिक ब्रह्मांड के रहस्य
हाल ही में मणिपुर के खगोलभौतिकीविद् Ronaldo Laishram के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने 12.6 अरब वर्ष पुराने एक विशाल गैलेक्सी प्रोटोक्लस्टर की खोज की है। इस संरचना को “लोकटक प्रोटोक्लस्टर” नाम दिया गया है, जो मणिपुर की प्रसिद्ध Loktak Lake से प्रेरित है। यह खोज प्रारंभिक ब्रह्मांड और आकाशगंगाओं के विकास को समझने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह संरचना उस समय अस्तित्व में थी जब ब्रह्मांड केवल लगभग 1.2 अरब वर्ष पुराना था। वैज्ञानिकों के अनुसार यह खोज हमें यह जानने में मदद करती है कि शुरुआती दौर में आकाशगंगाएँ किस प्रकार बनीं और समय के साथ उनका विकास कैसे हुआ।
प्रोटोक्लस्टर क्या होता है?
प्रोटोक्लस्टर आकाशगंगाओं का प्रारंभिक समूह होता है, जो समय के साथ विकसित होकर विशाल गैलेक्सी क्लस्टर का रूप लेता है। गैलेक्सी क्लस्टर ब्रह्मांड की सबसे बड़ी गुरुत्वाकर्षणीय संरचनाओं में गिने जाते हैं और इनमें सैकड़ों या हजारों आकाशगंगाएँ शामिल हो सकती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे प्रोटोक्लस्टर ब्रह्मांड की प्रारंभिक संरचना और डार्क मैटर के वितरण को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। घने वातावरण में स्थित आकाशगंगाएँ सामान्य क्षेत्रों की तुलना में अलग तरीके से विकसित होती हैं, क्योंकि उन पर गुरुत्वाकर्षण, गैस की उपलब्धता और पास की आकाशगंगाओं के प्रभाव अधिक होते हैं।
लोकटक प्रोटोक्लस्टर की विशेषताएँ
लोकटक प्रोटोक्लस्टर में चार आपस में जुड़ी हुई आकाशगंगा संरचनाएँ पाई गई हैं। वैज्ञानिकों ने इसकी तुलना लोकटक झील में पाए जाने वाले “फुमदी” से की है। फुमदी तैरते हुए वनस्पति, मिट्टी और जैविक पदार्थों के समूह होते हैं, जो झील की अनूठी पहचान माने जाते हैं। इस खोज के लिए Subaru Telescope और James Webb Space Telescope से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किया गया। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप आधुनिक खगोल विज्ञान की सबसे उन्नत वेधशालाओं में से एक है, जिसे 2021 में लॉन्च किया गया था।
प्रारंभिक ब्रह्मांड को समझने में मददगार खोज
वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्मांड की आयु लगभग 13.8 अरब वर्ष मानी जाती है। ऐसे में 12.6 अरब वर्ष पुरानी संरचना का अध्ययन प्रारंभिक ब्रह्मांड के विकास की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है। इससे यह समझने में सहायता मिलती है कि शुरुआती आकाशगंगाएँ किन परिस्थितियों में बनीं और बाद में कैसे विकसित हुईं। यह खोज विशेष रूप से “हाई-रेडशिफ्ट” संरचनाओं के अध्ययन में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे वैज्ञानिकों को प्रारंभिक ब्रह्मांड में पदार्थों के वितरण और विशाल संरचनाओं के निर्माण की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Loktak Lake उत्तर-पूर्व भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है।
- फुमदी लोकटक झील में पाए जाने वाले तैरते हुए वनस्पति और जैविक पदार्थों के समूह होते हैं।
- James Webb Space Telescope एक इन्फ्रारेड अंतरिक्ष वेधशाला है, जिसे 2021 में प्रक्षेपित किया गया था।
- Subaru Telescope हवाई में स्थित 8.2 मीटर का ऑप्टिकल-इन्फ्रारेड टेलीस्कोप है।
- इस शोध के निष्कर्ष The Astrophysical Journal Letters में प्रकाशित किए गए हैं।
लोकटक प्रोटोक्लस्टर की खोज भारतीय वैज्ञानिकों की वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है। यह उपलब्धि न केवल मणिपुर बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है। साथ ही, यह खोज प्रारंभिक ब्रह्मांड और आकाशगंगाओं के निर्माण से जुड़े कई नए रहस्यों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।