विश्व हाथी दिवस पर गज गौरव पुरस्कारों से संरक्षण कार्य को नई पहचान
विश्व हाथी दिवस 2026 के राष्ट्रीय समारोह के दौरान आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में गज गौरव पुरस्कार प्रदान किए गए। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में भारत में हाथी संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों को सम्मानित किया गया।
गज गौरव पुरस्कारों का महत्व
गज गौरव पुरस्कार राष्ट्रीय स्तर के ऐसे सम्मान हैं, जो हाथियों के संरक्षण, देखभाल और मानव-हाथी संघर्ष के प्रबंधन में योगदान देने वालों को दिए जाते हैं। 2026 के पुरस्कार केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने विश्व हाथी दिवस के अवसर पर प्रदान किए। यह सम्मान उन लोगों को विशेष पहचान देता है जो अक्सर कठिन परिस्थितियों में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए काम करते हैं।
जलपाईगुड़ी क्षेत्र के महावतों का साहसिक योगदान
इस वर्ष पश्चिम बंगाल के जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान से जुड़े सात महावतों को उनके बाढ़-राहत कार्य के लिए सम्मानित किया गया। बिकाश खड़िया और राजीव ओरांव ने भीषण बाढ़ के दौरान छह फंसे हुए पालतू हाथियों को सुरक्षित निकाला, जबकि अजीबुल हक, अजीत गाबुर, मोंटाज आलम, अमसुर खड़िया और दिलीप मुंडा ने 13 विस्थापित जंगली गैंडों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में मदद की। यह उदाहरण बताता है कि वन्यजीव संरक्षण केवल नीति या योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय समुदायों की तत्परता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
‘30 जायंट स्टेप्स’ और दक्षिण भारत के लिए नई कार्ययोजना
मंत्रालय ने इस अवसर पर “30 Giant Steps” नामक दस्तावेज भी जारी किया, जिसमें 2020 से 2026 के बीच प्रोजेक्ट एलीफेंट के तहत हासिल 30 उपलब्धियों और नीतिगत पहलों का उल्लेख है। इसके साथ ही दक्षिण भारत में मानव-हाथी संघर्ष की व्यापक समझ और प्रबंधन के लिए एक क्षेत्रीय कार्ययोजना भी शुरू की गई। यह योजना कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के लिए है और इसके लिए भारत सरकार की ओर से 500 करोड़ रुपये की वित्तीय प्रतिबद्धता की गई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विश्व हाथी दिवस हर साल 12 अगस्त को मनाया जाता है।
- प्रोजेक्ट एलीफेंट भारत सरकार की एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य हाथियों का संरक्षण और उनके आवास की सुरक्षा है।
- जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान पश्चिम बंगाल में स्थित है और भारतीय एक-सींग वाले गैंडे तथा हाथियों के लिए जाना जाता है।
- मानव-हाथी संघर्ष कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में एक प्रमुख संरक्षण चुनौती है।
आंध्र प्रदेश की तकनीक-आधारित पहल भी चर्चा में
कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री कोनिडाला पवन कल्याण विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए और उन्होंने राज्य की तकनीक-आधारित H.A.N.U.M.A.N. वन्यजीव निगरानी पहल की जानकारी दी। यह पहल वन्यजीवों की निगरानी और संघर्ष प्रबंधन से जुड़ी है, जिससे संरक्षण कार्यों में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा मिलता है।
गज गौरव पुरस्कारों के जरिए यह संदेश स्पष्ट हुआ कि हाथी संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रशासन, स्थानीय समुदाय और तकनीक—तीनों के समन्वय से ही प्रभावी हो सकता है।