विशाखापत्तनम में गूगल का एआई केंद्र, निवेश के साथ पर्यावरणीय सवाल
गूगल आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 15 अरब डॉलर की लागत वाला कृत्रिम बुद्धिमत्ता डेटा केंद्र विकसित कर रहा है। कंपनी के अनुसार, यह अमेरिका के बाहर उसका सबसे बड़ा एआई केंद्र होगा और 2028 में परिचालन शुरू करने की योजना है। यह परियोजना 2026 से 2030 के बीच भारत में गूगल के प्रस्तावित 15 अरब डॉलर के निवेश का हिस्सा है।
तीन स्थलों पर बनेगा विशाल डेटा केंद्र
यह परिसर 600 एकड़ से अधिक क्षेत्र में तीन स्थानों पर विकसित किया जाएगा। परियोजना में गूगल की साझेदारी अदाणी समूह के साथ है और इसका आकार गीगावाट स्तर का होगा। डेटा केंद्रों में सर्वर, भंडारण प्रणालियां और नेटवर्क उपकरण रखे जाते हैं। ये डिजिटल सूचनाओं को संसाधित और सुरक्षित रखते हैं। एआई प्रणालियों को प्रशिक्षित करने और चलाने के लिए बड़ी कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है, इसलिए ऐसे केंद्र आधुनिक डिजिटल ढांचे का अहम हिस्सा हैं।
विशाखापत्तनम की कनेक्टिविटी और अंतरराष्ट्रीय समुद्री इंटरनेट केबलों तक पहुंच को इस स्थान के चयन के प्रमुख कारणों में गिना गया है। समुद्र तल पर बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलें देशों के बीच बड़ी मात्रा में दूरसंचार और इंटरनेट डेटा पहुंचाती हैं।
पानी और बिजली की उपलब्धता पर ध्यान
डेटा केंद्रों में उपकरणों से पैदा होने वाली गर्मी को नियंत्रित करने के लिए शीतलन व्यवस्था जरूरी होती है। गूगल के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अवसंरचना और ऊर्जा प्रमुख अलेक्जेंडर स्मिथ के अनुसार, कंपनी ने स्थल चुनने से पहले स्थानीय जलग्रहण क्षेत्र का आकलन किया। इसके बाद पानी पर आधारित शीतलन के बजाय हवा से ठंडा करने वाली तकनीक चुनी गई। जलग्रहण क्षेत्र वह भूभाग है जहां से वर्षा और जलधाराएं किसी साझा जलस्रोत की ओर बहती हैं।
कंपनी ने 2030 तक अपने परिचालन में शीतलन के अलावा अन्य जरूरतों के लिए इस्तेमाल किए गए मीठे पानी की मात्रा का 120 प्रतिशत फिर से उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मीठे पानी की उपलब्धता, पारिस्थितिकी पर असर और बिजली आपूर्ति पर बढ़ते दबाव को लेकर चिंता जताई है। गूगल ने कहा है कि वह बिजली ढांचे में जरूरी सुधारों और अतिरिक्त स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए निवेश करेगा।
भूमि, रोजगार और कानूनी चुनौतियां
तारलुवाड़ा के कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि पर्याप्त सूचना दिए बिना जमीन ली गई और घोषित लाभ उन्हें नहीं मिले। आंध्र प्रदेश सरकार ने जबरन भूमि अधिग्रहण के आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि पात्र निवासियों को मुआवजा दिया गया। अगस्त 2026 में पर्यावरणीय स्वीकृतियों को चुनौती देते हुए आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर हुई थी, लेकिन उससे निर्माण नहीं रुका। परियोजना की मंजूरियों के खिलाफ राष्ट्रीय हरित अधिकरण में भी तीन याचिकाएं दायर की गई हैं।
गूगल का अनुमान है कि परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था में हर साल लगभग 688 मिलियन डॉलर की गतिविधि पैदा हो सकती है। कंपनी के मुताबिक, तीन से पांच साल के निर्माण चरण में किसी सामान्य डेटा केंद्र परियोजना में सालाना करीब 4,200 निर्माण श्रमिक काम करते हैं और परिचालन शुरू होने के बाद सैकड़ों विशेषज्ञ पदों को सहारा मिलता है। आंध्र प्रदेश सरकार ने परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1,88,000 रोजगार बनने का अनुमान जताया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत पर्यावरण संबंधी मामलों के निपटारे के लिए हुई थी।
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण सतत विकास, एहतियाती सिद्धांत और प्रदूषक द्वारा भुगतान जैसे सिद्धांतों को लागू करता है।
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण एक वैधानिक निकाय है और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है; इसकी क्षेत्रीय पीठें भी हैं।
- समुद्र के नीचे बिछाई गई फाइबर-ऑप्टिक केबलें अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार और इंटरनेट डेटा का संचार करती हैं।
विशाखापत्तनम की परियोजना भारत में एआई कंप्यूटिंग क्षमता और डिजिटल निवेश को बढ़ा सकती है। इसके दीर्घकालीन लाभ इस बात पर भी निर्भर करेंगे कि निर्माण के साथ जल, ऊर्जा, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों से जुड़ी चिंताओं का समाधान कैसे किया जाता है।