विदेशी कर सूचना विनिमय का नया ढांचा
भारत में विदेशी कर सूचना के आदान-प्रदान से जुड़ा नया ढांचा 1 जुलाई 2026 से लागू होगा। इसका उद्देश्य सीमा-पार कर चोरी, अघोषित विदेशी आय और offshore assets से जुड़े मामलों की जांच को तेज और अधिक पारदर्शी बनाना है।
विदेशी अनुरोधों को उच्च प्राथमिकता
नए नियमों के तहत विदेशी कर क्षेत्रों से आने वाले सभी अनुरोध “उच्च प्राथमिकता” में रखे जाएंगे। आयकर विभाग को उपलब्ध सूचना 15 दिनों के भीतर साझा करनी होगी। यदि पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित अधिकारी को इसी अवधि में अंतरिम रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें प्रगति, बाधाएं और संभावित समयसीमा बतानी होगी।
भारत के अनुरोधों पर सख्त निगरानी
भारत द्वारा दूसरे देशों को भेजे जाने वाले कर सूचना अनुरोधों की भी कड़ी समीक्षा होगी। इन outbound requests की मासिक ट्रैकिंग की जाएगी, ताकि मामलों में देरी कम हो और जवाबदेही बढ़े। यह व्यवस्था द्विपक्षीय कर संधियों और बहुपक्षीय सहयोग तंत्रों के तहत सूचना विनिमय को मजबूत करेगी।
कर चोरी रोकने में भूमिका
कर सूचना विनिमय का इस्तेमाल अघोषित आय, विदेशी बैंक खातों, offshore assets, cross-border transactions और transfer pricing से जुड़े मामलों की जांच में किया जाता है। इससे कर प्रशासन को वित्तीय रिकॉर्ड की पुष्टि करने और treaty-based cooperation को प्रभावी बनाने में मदद मिलती है।
क्रिप्टो परिसंपत्तियों पर निगरानी
भारत अप्रैल 2027 से सीमा-पार crypto asset data साझा करने की तैयारी कर रहा है। यह कदम डिजिटल परिसंपत्तियों की बढ़ती निगरानी और अंतरराष्ट्रीय कर अनुपालन ढांचे से जुड़ा है। इससे क्रिप्टो लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आयकर विभाग भारत में कर सूचना विनिमय का प्रमुख प्राधिकरण है।
- कर सूचना विनिमय का उपयोग कर चोरी और money laundering के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग में होता है।
- भारत अप्रैल 2027 से crypto asset data sharing शुरू करने की तैयारी में है।
- भारत कर संधियों और वैश्विक reporting standards के तहत सूचना विनिमय करता है।
नया ढांचा भारत की कर प्रशासन प्रणाली को अधिक तेज, जवाबदेह और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सीमा-पार वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी और कर चोरी से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।