भारत में लागू होंगे नए CAFE-III मानक और ADAS नियम

भारत में लागू होंगे नए CAFE-III मानक और ADAS नियम

भारत सरकार ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में ईंधन दक्षता और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE-III) मानकों और एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) नियमों को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। CAFE-III मानक 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2032 तक लागू रहेंगे। वहीं भारी वाहनों के लिए ADAS अनिवार्यता नए मॉडलों पर 1 अप्रैल 2026 और मौजूदा मॉडलों पर 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। इन नियमों का उद्देश्य प्रदूषण कम करना, ईंधन दक्षता बढ़ाना और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाना है।

CAFE-III मानकों का उद्देश्य

CAFE यानी कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी मानक वाहन निर्माताओं के लिए बनाए गए ईंधन दक्षता नियम हैं। इनका उद्देश्य वाहनों से होने वाले औसत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को सीमित करना है। भारत में इन मानकों को ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) द्वारा तैयार किया गया है, जो विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। CAFE-III के तहत वाहन निर्माताओं को अपने पूरे वाहन बेड़े के औसत उत्सर्जन को वित्त वर्ष 2032 तक लगभग 78.9 ग्राम प्रति किलोमीटर तक लाना होगा। वर्तमान CAFE-II चरण के अंत तक यह सीमा लगभग 113 ग्राम प्रति किलोमीटर है। इससे पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता घटेगी तथा ऊर्जा दक्ष वाहनों को बढ़ावा मिलेगा।

किन वाहनों पर लागू होंगे नियम

ये मानक M1 श्रेणी के यात्री वाहनों पर लागू होंगे। इस श्रेणी में ऐसे वाहन शामिल हैं जिनमें अधिकतम नौ लोगों के बैठने की क्षमता होती है और जिनका सकल वाहन भार 3,500 किलोग्राम तक होता है। इसमें अधिकांश निजी कारें और बहुउद्देश्यीय यात्री वाहन शामिल हैं।

सुपर क्रेडिट योजना और नई तकनीक

CAFE-III में सुपर क्रेडिट योजना को भी शामिल किया गया है। इस योजना के तहत कुछ विशेष तकनीकों वाले वाहनों को अतिरिक्त नियामकीय लाभ दिया जाएगा। बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों को 3.0 का मल्टीप्लायर, प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों को 2.5 और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों को 1.6 का मल्टीप्लायर मिलेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य वाहन कंपनियों को स्वच्छ और उन्नत तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों का उत्पादन बढ़ने की संभावना है।

भारी वाहनों के लिए ADAS अनिवार्य

भारत सरकार ने भारी वाहनों में ADAS तकनीक को अनिवार्य बनाने का निर्णय लिया है। यह नियम बसों, ट्रकों और बड़े यात्री वाहनों पर लागू होगा। ADAS यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम ऐसी इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा तकनीकों का समूह है जो सेंसर, कैमरा, रडार और सॉफ्टवेयर की मदद से चालक को सहायता प्रदान करता है। अनिवार्य ADAS फीचर्स में एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम (AEBS), लेन डिपार्चर वार्निंग सिस्टम (LDWS), ब्लाइंड स्पॉट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (BSIS), मूविंग ऑफ इन्फॉर्मेशन सिस्टम (MOIS) और ड्राइवर ड्रोसिनेस एवं अटेंशन वार्निंग सिस्टम शामिल हैं। इन तकनीकों से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

भारत में ADAS बाजार का विस्तार

भारत में ADAS बाजार तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में इसका मूल्य लगभग 1.15 अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया है और 2031 तक इसके 3.12 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। 2026 से 2031 के बीच इसकी वार्षिक वृद्धि दर लगभग 18.12 प्रतिशत रहने की संभावना है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सितंबर 2025 में पुणे में देश का पहला ADAS टेस्ट सिटी शुरू किया था। यहां भारतीय सड़क और यातायात परिस्थितियों के अनुसार नई सुरक्षा तकनीकों का परीक्षण किया जाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • CAFE का पूरा नाम कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी है।
  • ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • ADAS तकनीक सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए विकसित की गई है।
  • AEBS प्रणाली आपात स्थिति में स्वतः ब्रेक लगाने में सक्षम होती है।

भारत में CAFE-III और ADAS नियमों का लागू होना ऑटोमोबाइल उद्योग में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। इससे वाहन अधिक सुरक्षित, ईंधन दक्ष और पर्यावरण अनुकूल बनेंगे। साथ ही इलेक्ट्रिक और स्मार्ट वाहन तकनीकों को भी नई गति मिलने की संभावना है।

Originally written on May 23, 2026 and last modified on May 23, 2026.

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