वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण, राज्यसभा से अहम संशोधन पारित
राज्यसभा ने 29 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में संशोधन विधेयक पारित कर दिया, जिसके बाद राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को भी कानूनी संरक्षण मिल गया है। इस संशोधन के तहत अब वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर बाधा डालना या उसके गायन में व्यवधान पैदा करना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
क्या बदला है नए संशोधन में
यह संशोधन राष्ट्रीय सम्मान के अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में किया गया है। अब तक यह कानून राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान से जुड़े अपमान या अनादर के मामलों पर लागू होता था। नए प्रावधान के साथ वंदे मातरम् को भी इसी कानूनी ढांचे के भीतर सुरक्षा दी गई है।संशोधित प्रावधान के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम् के गायन को रोकता है या किसी सभा में उसके गायन में बाधा डालता है, तो उसे तीन वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
संसद में कैसे पारित हुआ विधेयक
यह विधेयक 24 जुलाई 2026 को गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में पेश किया था। 29 जुलाई को सदन में विपक्षी सदस्यों के बड़े हिस्से के वॉकआउट के बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।सरकार ने इस संशोधन को वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर से भी जोड़ा है। विधेयक में राज्य विधानसभाओं में आधिकारिक आयोजनों के दौरान वंदे मातरम् के गायन को अनिवार्य करने का प्रावधान भी शामिल है।
वंदे मातरम् का ऐतिहासिक और संवैधानिक महत्व
वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह पहली बार 1882 में उनके उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ था। दूसरी ओर, जन गण मन को 24 जनवरी 1950 को भारत का राष्ट्रीय गान अपनाया गया।भारतीय संवैधानिक और सांस्कृतिक इतिहास में वंदे मातरम् का विशेष स्थान रहा है, लेकिन यह राष्ट्रीय गान नहीं है। इसी वजह से इसके कानूनी संरक्षण और औपचारिक मान्यता को लेकर यह संशोधन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय सम्मान के अपमान निवारण अधिनियम, 1971 भारत का केंद्रीय कानून है, जो राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान से जुड़े अपमान को नियंत्रित करता है।
- वंदे मातरम् बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना है और यह आनंदमठ उपन्यास से जुड़ा है।
- जन गण मन भारत का राष्ट्रीय गान है, जबकि वंदे मातरम् राष्ट्रीय गीत है।
- संशोधन के तहत वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर बाधा डालने पर तीन वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
इस संशोधन के बाद वंदे मातरम् को लेकर कानूनी स्थिति और स्पष्ट हो गई है। यह कदम राष्ट्रीय प्रतीकों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।