असम में विरासत स्थलों के आसपास भूमि सुरक्षा का नया ढांचा
असम विधानसभा ने 29 जुलाई 2026 को असम भूमि और राजस्व विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया, जिसका उद्देश्य राज्य के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के आसपास भूमि स्वामित्व और लेन-देन को नियंत्रित करना है। यह कानून 250 वर्ष या उससे अधिक पुराने विरासत और धार्मिक संस्थानों के चारों ओर अधिकतम 5 किलोमीटर तक के क्षेत्र को संरक्षित दायरे में लाता है।
संरक्षित विरासत क्षेत्र का दायरा
विधेयक के तहत यह प्रावधान सभी समुदायों के उन धार्मिक और विरासत स्थलों पर लागू होगा, जो कम से कम 250 वर्ष पुराने हैं। ऐसे स्थलों के आसपास एक कानूनी बफर जोन बनाया जाएगा, ताकि भूमि पर बाहरी दबाव, अनियंत्रित खरीद-बिक्री और अतिक्रमण जैसी स्थितियों को रोका जा सके।इस व्यवस्था का मकसद केवल भूमि नियंत्रण नहीं, बल्कि उन स्थलों के सामाजिक-धार्मिक और ऐतिहासिक स्वरूप को बनाए रखना भी है, जो लंबे समय से स्थानीय पहचान का हिस्सा रहे हैं।
कौन खरीद-बेच और कब्जा कर सकेगा
संरक्षित क्षेत्र में भूमि खरीदने, बेचने और रखने का अधिकार केवल कुछ श्रेणियों को दिया गया है। इनमें मूल निवासी, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, स्वदेशी जातीय समुदाय और अन्य निर्दिष्ट वंचित समूह शामिल हैं।विधेयक में जिन स्वदेशी जातीय समुदायों का उल्लेख किया गया है, उनमें अहोम, मोरान, मोटक, चुतिया और कोच राजबंशी शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि कानून का फोकस स्थानीय आबादी और पारंपरिक समुदायों के हितों की सुरक्षा पर है।
मूल निवासी की परिभाषा और प्रशासनिक अधिकार
संशोधन विधेयक में “मूल निवासी” की एक स्पष्ट कानूनी परिभाषा दी गई है। इसके अनुसार, वह व्यक्ति मूल निवासी माना जाएगा, जिसके परिवार की उस क्षेत्र में कम से कम तीन पीढ़ियों से उपस्थिति हो, और यह गणना 1 जनवरी 2006 की स्थिति के आधार पर की जाएगी।कानूनी उपयोग के लिए एक पीढ़ी की अवधि 25 वर्ष मानी गई है। साथ ही, जिला आयुक्त को संरक्षित विरासत क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे लोगों को बेदखल करने का अधिकार भी दिया गया है। इससे प्रवर्तन व्यवस्था को अधिक स्पष्ट और सख्त बनाया गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- असम भूमि और राजस्व विनियमन राज्य का प्रमुख भूमि कानून ढांचा माना जाता है।
- कामाख्या मंदिर गुवाहाटी में स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है।
- बरपेटा सत्र और माजुली के सत्र असम की वैष्णव सत्र परंपरा से जुड़े हैं।
- हाजो स्थित पोआ मक्का हिंदू और इस्लामी परंपराओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है।
यह संशोधन असम में विरासत स्थलों के संरक्षण और भूमि प्रबंधन के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि 2024 में पारित पहले संस्करण को लागू नहीं किया गया था, जबकि 2026 के संशोधन में 1 जनवरी 2006 की कट-ऑफ तिथि और पीढ़ी की स्पष्ट परिभाषा जोड़ी गई है।