एफएसएसएआई की सख्ती: न्यूट्रास्यूटिकल इकाइयों पर निगरानी का संदेश
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 30 जुलाई 2026 को डियोर फार्मास्यूटिकल्स का न्यूट्रास्यूटिकल लाइसेंस निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई पंजाब स्थित कंपनी की विनिर्माण इकाई में गंभीर उल्लंघनों और अच्छे विनिर्माण मानकों के पालन में कमी पाए जाने के बाद की गई। आदेश के साथ यह स्पष्ट संदेश भी गया कि खाद्य सुरक्षा से जुड़ी इकाइयों में गुणवत्ता, स्वच्छता और ट्रेसबिलिटी से समझौता स्वीकार्य नहीं है।
एफएसएसएआई की कार्रवाई क्यों अहम है
न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद खाद्य स्रोतों से बने ऐसे उत्पाद होते हैं, जिनका उपयोग आहार अनुपूरक या फंक्शनल फूड के रूप में किया जाता है। भारत में इन्हें खाद्य सुरक्षा ढांचे के तहत नियंत्रित किया जाता है। इसलिए इनकी उत्पादन इकाइयों पर वही सख्त मानक लागू होते हैं, जो खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और उपभोक्ता संरक्षण के लिए जरूरी माने जाते हैं। एफएसएसएआई ने निरीक्षण के दौरान पाया कि कंपनी की इकाई में ढांचे, साफ-सफाई, कीट नियंत्रण, भंडारण व्यवस्था और कर्मचारियों की स्वच्छता से जुड़े मानकों का पालन संतोषजनक नहीं था। नियामक के अनुसार, कंपनी अपने उत्पादों की सुरक्षा, गुणवत्ता और ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने में विफल रही।
गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज का मतलब क्या है
गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज यानी जीएमपी उन मानकों का समूह है, जिनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि किसी खाद्य या औषधीय उत्पाद का निर्माण सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण में हो। इसमें साफ-सफाई, उपकरणों का रखरखाव, कच्चे माल और तैयार उत्पादों का सही भंडारण, कीट नियंत्रण और कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता शामिल होती है। यदि किसी इकाई में इन बुनियादी मानकों की अनदेखी होती है, तो उत्पाद की गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा दोनों पर असर पड़ सकता है। इसी कारण एफएसएसएआई जैसी संस्था निरीक्षण के आधार पर लाइसेंस निलंबन या रद्द करने जैसी कार्रवाई कर सकती है।
अब कंपनी को क्या करना होगा
निलंबन आदेश के बाद संबंधित इकाई में सभी विनिर्माण गतिविधियां तुरंत रोकनी होंगी, जब तक कि पूर्ण अनुपालन स्थापित न हो जाए और उसे नियामक द्वारा सत्यापित न कर लिया जाए। इसका अर्थ है कि कंपनी को अपनी उत्पादन व्यवस्था, स्वच्छता मानकों, भंडारण प्रणाली और अन्य प्रक्रियाओं में सुधार करना होगा। यह मामला उन सभी खाद्य और न्यूट्रास्यूटिकल इकाइयों के लिए भी चेतावनी है, जो केवल लाइसेंस होने को पर्याप्त मान लेती हैं। वास्तविक अनुपालन तभी माना जाता है जब उत्पादन प्रक्रिया हर स्तर पर मानकों के अनुरूप हो और निरीक्षण में उसे साबित भी किया जा सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एफएसएसएआई की स्थापना खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत की गई है।
- भारत में न्यूट्रास्यूटिकल्स को खाद्य उत्पादों के रूप में खाद्य सुरक्षा ढांचे के तहत नियंत्रित किया जाता है।
- जीएमपी में स्वच्छता, सैनिटेशन, भंडारण, कीट नियंत्रण और कर्मचारियों के आचरण से जुड़े मानक शामिल होते हैं।
- ट्रेसबिलिटी का अर्थ है किसी उत्पाद को उत्पादन से वितरण तक ट्रैक करने की क्षमता।
इस कार्रवाई से साफ है कि खाद्य सुरक्षा नियामक अब निरीक्षण और अनुपालन को लेकर पहले से अधिक सख्त रुख अपना रहा है। उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए ऐसी निगरानी आगे भी जारी रहने की संभावना है।