लद्दाख के सभी सात जिलों में बनेंगे स्वायत्त हिल विकास परिषद
लद्दाख प्रशासन ने 13 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केंद्र शासित प्रदेश के सभी सात जिलों में स्वायत्त हिल विकास परिषद (ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल) गठित करने की घोषणा की है। यह निर्णय अप्रैल 2026 में पांच नए जिलों के गठन के बाद लिया गया है। इसके तहत अब लेह, कारगिल, नुब्रा, चांगथांग, शाम, जांस्कर और द्रास—सभी सात जिलों में निर्वाचित हिल परिषदें कार्य करेंगी। इस कदम का उद्देश्य स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना और जिला स्तर पर विकास कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना है।
स्वायत्त हिल विकास परिषद क्या है?
स्वायत्त हिल विकास परिषद लद्दाख में जिला स्तर की निर्वाचित स्थानीय निकाय है, जो लद्दाख स्वायत्त हिल विकास परिषद अधिनियम के तहत कार्य करती है। इन परिषदों का उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन को अधिक अधिकार देना तथा विकास योजनाओं का बेहतर संचालन सुनिश्चित करना है। लेह में वर्ष 1995 से और कारगिल में वर्ष 2003 से स्वायत्त हिल विकास परिषद कार्यरत है। अब शेष पांच नए जिलों में भी इसी प्रकार की परिषदों का गठन किया जाएगा।
लद्दाख के सात जिलों की नई प्रशासनिक व्यवस्था
अप्रैल 2026 से पहले लद्दाख में केवल दो जिले—लेह और कारगिल—थे। इसके बाद प्रशासनिक सुविधा और विकास को ध्यान में रखते हुए पांच नए जिले बनाए गए। नए जिलों में नुब्रा, चांगथांग, शाम, जांस्कर और द्रास शामिल हैं। इस पुनर्गठन के बाद लद्दाख में कुल जिलों की संख्या सात हो गई है। अब प्रत्येक जिले को अपनी स्वायत्त हिल विकास परिषद प्राप्त होगी, जिससे स्थानीय प्रशासन को अधिक विकेंद्रीकृत स्वरूप मिलेगा।
परिषदों की शक्तियां और जिम्मेदारियां
नई परिषदों को कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार दिए जाएंगे। इनमें भूमि स्वामित्व और भूमि आवंटन से जुड़े निर्णय लेने की शक्ति, जिला संवर्ग के पदों पर भर्ती और पदोन्नति, तथा स्थानीय स्तर पर कर और शुल्क लगाने का अधिकार शामिल होगा। इसके अलावा परिषदें स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, स्थानीय आधारभूत संरचना और सामाजिक कल्याण योजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी भी निभाएंगी। प्रत्येक जिला अपनी राजस्व व्यवस्था और विकास योजनाओं के अनुसार कार्य कर सकेगा, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास को गति मिलेगी।
केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर प्रस्तावित नई व्यवस्था
जिला परिषदों के अतिरिक्त लद्दाख में सातों हिल परिषदों के ऊपर एक केंद्र शासित प्रदेश स्तर की संस्था गठित करने का भी प्रस्ताव है। यह संस्था संविधान के अनुच्छेद 371 की तर्ज पर विशेष प्रावधानों के तहत कार्य कर सकती है। प्रस्तावित निकाय को विधायी, कार्यकारी, वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार दिए जाने की योजना है। इससे पूरे केंद्र शासित प्रदेश में नीतिगत समन्वय और विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायता मिलने की उम्मीद है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- लद्दाख 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद केंद्र शासित प्रदेश बना था।
- लेह और कारगिल लद्दाख के मूल दो जिले हैं।
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 371 देश के कुछ राज्यों और क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधानों से संबंधित है।
- लद्दाख स्वायत्त हिल विकास परिषद अधिनियम क्षेत्र में जिला स्तरीय स्वायत्त परिषदों का कानूनी आधार प्रदान करता है।
लद्दाख के सभी सात जिलों में स्वायत्त हिल विकास परिषदों का गठन स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे प्रशासनिक विकेंद्रीकरण को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होगा और पहाड़ी क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप शासन व्यवस्था को अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा।