आंध्र प्रदेश में लिथियम-गैलियम खोज से खनिज रणनीति को नई रफ्तार
आंध्र प्रदेश ने महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और खनन-तकनीक विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य के खनिज एवं भूविज्ञान विभाग ने 12 अगस्त 2026 को सीएसआईआर-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान के साथ कडपा बेसिन में लिथियम और गैलियम भंडारों की खोज के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता विजयवाड़ा स्थित राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और खनन मंत्री कोल्लू रविंद्र की मौजूदगी में हुआ।
क्यों अहम हैं लिथियम और गैलियम
लिथियम और गैलियम को आज की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण खनिज माना जाता है। लिथियम का उपयोग रिचार्जेबल बैटरियों, सिरेमिक, स्नेहक और मिश्रधातुओं में होता है। दूसरी ओर, गैलियम सेमीकंडक्टर, एलईडी, इंटीग्रेटेड सर्किट और सौर-सम्बंधित तकनीकों में काम आता है। इन दोनों खनिजों की मांग ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही है, इसलिए इनकी खोज रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कडपा बेसिन में खोज का फोकस
यह भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण कडपा बेसिन के वेम्पल्ले और थुम्मलापल्ले क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा। प्रारंभिक अध्ययनों में इन इलाकों में लिथियम की मात्रा 1,000 पार्ट्स प्रति मिलियन तक और गैलियम की मात्रा 250 पार्ट्स प्रति मिलियन तक पाई गई थी। कडपा बेसिन आंध्र प्रदेश का एक अवसादी बेसिन है, जहां खनिज-समृद्ध संरचनाएं मिलती हैं। थुम्मलापल्ले क्षेत्र पहले से ही यूरेनियम खनिजीकरण के लिए भी जाना जाता है।
वित्तपोषण और तकनीकी सहयोग
इस परियोजना पर लगभग 140 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसका पूरा वित्तपोषण राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास करेगा। यह न्यास खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत बनाया गया एक वैधानिक ट्रस्ट है, जिसका उद्देश्य देश में खनिज अन्वेषण को बढ़ावा देना है। इसी दिन राज्य सरकार ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद-टेक्समिन के साथ भी एक अलग समझौता किया, जिसके तहत खनन क्षेत्र में प्रौद्योगिकी और कौशल विकास के लिए एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर माइनिंग स्थापित किया जाएगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- लिथियम का परमाणु क्रमांक 3 है और यह आवर्त सारणी के समूह 1 में आता है।
- गैलियम का परमाणु क्रमांक 31 है और यह लगभग 29.8°C पर पिघल जाता है।
- राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास भारत में खनिज खोज को वित्तीय सहायता देने के लिए बनाया गया है।
- आईआईटी (आईएसएम) धनबाद भारत में खनन, भूविज्ञान और पृथ्वी विज्ञान अध्ययन का प्रमुख संस्थान है।
इस समझौते से आंध्र प्रदेश में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को संस्थागत समर्थन मिलेगा और खनन क्षेत्र में तकनीकी क्षमता भी मजबूत हो सकती है। ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए लिथियम-गैलियम जैसे खनिजों की उपलब्धता भविष्य में राज्य की भूमिका को और अहम बना सकती है।