उत्तराखंड हाईकोर्ट शिफ्टिंग से हल्द्वानी बनेगा नया न्यायिक केंद्र
उत्तराखंड सरकार ने नैनीताल स्थित हाईकोर्ट को हल्द्वानी स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को औपचारिक मंजूरी दे दी है। अगस्त 2026 में जारी अंतिम आदेश के तहत हल्द्वानी-रुद्रपुर हाईवे (NH-05) पर लामाचौर में 30 हेक्टेयर भूमि को नए हाईकोर्ट परिसर के लिए चिन्हित किया गया है। यह फैसला राज्य की न्यायिक संरचना, प्रशासनिक व्यवस्था और क्षेत्रीय विकास, तीनों दृष्टियों से अहम माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रास्ता साफ
इस स्थानांतरण को लेकर पहले कानूनी अड़चनें थीं, लेकिन 16 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने 2024 के उस उत्तराखंड हाईकोर्ट आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें शिफ्टिंग पर रोक लगाई गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट की स्थापना या स्थानांतरण एक प्रशासनिक निर्णय है। इसके साथ ही राज्य प्रशासन को आवश्यक मंजूरियां लेकर तय भूमि हाईकोर्ट को छह सप्ताह के भीतर सौंपने का निर्देश दिया गया।
लामाचौर की जमीन और नई योजना
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में 7 अगस्त 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में लामाचौर की वन भूमि हस्तांतरण को मंजूरी दी गई। इसके बाद 12 अगस्त 2026 के अंतिम सरकारी आदेश में जून 2023 की उस पुरानी योजना को बदल दिया गया, जिसमें गौलापार में 26.08 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित थी। नई योजना के अनुसार हाईकोर्ट परिसर NH-05 के किनारे बनेगा, जिससे पहुंच और कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। आदेश में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट के शिफ्ट होने के बाद नैनीताल में मौजूद मौजूदा न्यायिक ढांचे को राज्य सरकार को सौंप दिया जाएगा।
विवाद, पर्यावरणीय चिंता और आगे की प्रक्रिया
स्थानांतरण को लेकर पर्यावरणीय सवाल भी उठे हैं। 7 अगस्त 2026 को उत्तराखंड हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई, जिसमें प्रस्तावित स्थल को आरक्षित वन और हाथी गलियारा बताया गया। 8 अगस्त 2026 की स्थानीय रिपोर्टों में बेल बाबा मंदिर क्षेत्र और रामपुर रोड के आसपास पर्यावरणीय चिंता का उल्लेख किया गया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार निर्माण के लिए करीब 15,000 नवरोपित पौधों को हटाने की आवश्यकता पड़ सकती है। अंतिम मंजूरी के बाद न्याय विभाग के प्रधान सचिव अमित कुमार सिरोही ने आदेश जारी किया और लोक निर्माण विभाग को निर्माण संबंधी औपचारिकताएं तेज करने को कहा गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत के उच्च न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 214 के तहत स्थापित होते हैं।
- उच्च न्यायालयों का क्षेत्राधिकार संविधान और संबंधित कानूनों से तय होता है।
- जनहित याचिका (PIL) सार्वजनिक हित और सामूहिक अधिकारों से जुड़े मामलों में दायर की जाती है।
- NH-05 भारत की राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या प्रणाली का एक मार्ग है, जो उत्तर भारत के कई हिस्सों को जोड़ता है।
इस फैसले से उत्तराखंड की न्यायिक व्यवस्था का केंद्र नैनीताल से हल्द्वानी की ओर खिसक सकता है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि भूमि हस्तांतरण, पर्यावरणीय मंजूरियां और निर्माण कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं।