तमिलनाडु ने लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या बनाए रखने की मांग तेज की
तमिलनाडु विधानसभा ने 12 अगस्त 2026 को एक सरकारी प्रस्ताव के जरिए लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या 543 पर स्थायी रोक लगाने की मांग उठाई। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से यह भी कहा गया कि सीटों के मौजूदा अनुपात को बरकरार रखा जाए और जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों की संसदीय हिस्सेदारी कम न हो। यह कदम प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर दक्षिणी राज्यों की बढ़ती चिंता को सामने लाता है।
परिसीमन और प्रतिनिधित्व का सवाल
लोकसभा संविधान के अनुच्छेद 81 के तहत संसद का प्रत्यक्ष निर्वाचित निचला सदन है। इसकी वर्तमान स्वीकृत संख्या 543 निर्वाचित सदस्य है, जो 1971 की जनगणना के आधार पर 1977 के परिसीमन के बाद से अपरिवर्तित बनी हुई है। परिसीमन का अर्थ है जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण। तमिलनाडु के प्रस्ताव में कहा गया कि जिन राज्यों ने परिवार कल्याण और जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं, उन्हें कम प्रतिनिधित्व का नुकसान नहीं होना चाहिए।
महिला आरक्षण और सीटों का अनुपात
प्रस्ताव में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में तुरंत लागू करने की मांग भी की गई। साथ ही यह कहा गया कि आरक्षण की गणना मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर होनी चाहिए। विधानसभा ने लोकसभा और राज्यसभा के बीच मौजूदा 2.2:1 के प्रतिनिधित्व अनुपात को बनाए रखने की भी बात कही। राज्यसभा संसद का उच्च सदन है, जिसमें राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व निर्वाचित सदस्यों के माध्यम से होता है।
चेन्नई बैठक के बाद राजनीतिक संदेश
प्रस्ताव लाने से पहले मुख्यमंत्री ने 8 अगस्त 2026 को चेन्नई के कलैवनार अरंगम में तमिलनाडु के सांसदों की एक परामर्श बैठक बुलाई थी। यह बैठक केंद्र की प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के संदर्भ में हुई। तमिलनाडु के लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर 57 सांसद हैं, लेकिन बैठक में उपस्थिति को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए और कई डीएमके तथा एआईएडीएमके सांसद शामिल नहीं हुए। इससे स्पष्ट है कि परिसीमन का मुद्दा केवल तकनीकी नहीं, बल्कि राजनीतिक और संघीय संतुलन से भी जुड़ा हुआ है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- लोकसभा भारतीय संसद का निचला सदन है और राज्यसभा उच्च सदन।
- लोकसभा की वर्तमान निर्वाचित सदस्य संख्या 543 है।
- भारत में परिसीमन जनगणना-आधारित जनसंख्या आंकड़ों पर निर्भर करता है।
- 1971 की जनगणना लंबे समय तक संसदीय सीटों के संदर्भ बिंदु के रूप में इस्तेमाल होती रही है।
तमिलनाडु का यह प्रस्ताव आने वाले परिसीमन, महिला आरक्षण और राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर राष्ट्रीय बहस को और तेज कर सकता है। खासकर उन राज्यों के लिए यह मुद्दा अहम है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है।