असम में राज्यव्यापी मादक पदार्थ निस्तारण अभियान शुरू, ₹472.51 करोड़ के नशीले पदार्थ किए गए नष्ट
असम सरकार ने 12 जुलाई 2026 को राज्यव्यापी मादक पदार्थ निस्तारण अभियान की शुरुआत नलबाड़ी जिले के दौलासाल स्थित 14वीं असम पुलिस बटालियन मैदान से की। इस अभियान के तहत लगभग ₹472.51 करोड़ मूल्य के जब्त किए गए मादक एवं मन:प्रभावी पदार्थों को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी अवसर पर दौलासाल में असम के पहले नारकोटिक्स इंसीनेरेटर (दहन संयंत्र) का भी उद्घाटन किया गया, जो भविष्य में जब्त किए गए मादक पदार्थों के सुरक्षित निस्तारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मादक पदार्थों के निस्तारण की प्रक्रिया
अभियान के दौरान जब्त किए गए नशीले पदार्थों को नष्ट करने के लिए कुचलने (क्रशिंग) और नियंत्रित दहन (इंसीनेरेशन) की प्रक्रिया अपनाई गई। पहले सड़क रोलर की सहायता से मादक पदार्थों को कुचला गया और इसके बाद उन्हें इंसीनेरेटर में जलाकर पूरी तरह नष्ट किया गया। यह प्रक्रिया लगभग 10 दिनों तक चलने के लिए निर्धारित की गई है, ताकि सभी जब्त सामग्री का सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा सके। इंसीनेरेशन को दुनिया भर में जब्त किए गए मादक पदार्थों के नष्ट करने की मानक और सुरक्षित विधियों में शामिल माना जाता है, क्योंकि इससे इन पदार्थों के दोबारा अवैध उपयोग की संभावना समाप्त हो जाती है।
किन मादक पदार्थों को किया गया नष्ट?
इस अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में विभिन्न प्रकार के मादक और मन:प्रभावी पदार्थों का निस्तारण किया गया। इनमें लगभग 60 किलोग्राम हेरोइन, 38,000 किलोग्राम गांजा, 39 किलोग्राम मॉर्फीन तथा 4.97 लाख विभिन्न प्रकार की मन:प्रभावी गोलियां शामिल थीं। ये सभी पदार्थ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस अधिनियम, 1985 (एनडीपीएस अधिनियम) के अंतर्गत नियंत्रित श्रेणी में आते हैं। यह अधिनियम भारत में मादक पदार्थों के उत्पादन, परिवहन, भंडारण, बिक्री और उपयोग को विनियमित करता है तथा इनके अवैध व्यापार पर कठोर दंड का प्रावधान करता है।
असम में मादक पदार्थों के विरुद्ध कार्रवाई
पिछले पांच वर्षों में असम पुलिस ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत 3,300 से अधिक मामले दर्ज किए हैं। इसी अवधि में राज्य में ₹3,227 करोड़ से अधिक मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। यह आंकड़ा राज्य में नशीले पदार्थों के विरुद्ध चलाए जा रहे व्यापक अभियान और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सक्रियता को दर्शाता है। इस राज्यव्यापी अभियान के अंतर्गत असम के अन्य जिलों में भी एक साथ मादक पदार्थ निस्तारण अभियान चलाया गया। दौलासाल में स्थापित राज्य का पहला नारकोटिक्स इंसीनेरेटर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराया गया है, जिससे भविष्य में ऐसे अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 भारत में मादक पदार्थों के नियंत्रण से संबंधित प्रमुख कानून है।
- हेरोइन एक अर्ध-संश्लेषित ओपिऑयड (अफीम वर्ग का मादक पदार्थ) है, जो मॉर्फीन से तैयार की जाती है।
- गांजा (कैनाबिस उत्पाद) भी भारत के एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत नियंत्रित मादक पदार्थों की श्रेणी में आता है।
- इंसीनेरेशन (नियंत्रित दहन) जब्त किए गए मादक पदार्थों के सुरक्षित और स्थायी निस्तारण की मानक प्रक्रिया मानी जाती है।
असम का यह राज्यव्यापी अभियान मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने और समाज को नशामुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक इंसीनेरेशन सुविधा और समन्वित कार्रवाई से राज्य में नशीले पदार्थों के सुरक्षित निस्तारण और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को नई मजबूती मिलेगी।