लक्षद्वीप में मिला विशाल ‘पोटैटो पैच’ प्रवाल उपनिवेश, समुद्री जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण खोज
भारत के लक्षद्वीप द्वीपसमूह के कदमत द्वीप के निकट वैज्ञानिकों ने एक विशाल प्रवाल (कोरल) उपनिवेश का दस्तावेजीकरण किया है, जिसे स्थानीय रूप से “पोटैटो पैच” कहा जाता है। यह प्रवाल संरचना पावोना क्लेवस प्रजाति की है और लगभग 4,250 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली हुई है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह अपनी तरह की दुनिया की सबसे बड़ी ज्ञात जीवित प्रवाल संरचनाओं में से एक हो सकती है। इस खोज को समुद्री पारिस्थितिकी और प्रवाल संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
पोटैटो पैच प्रवाल उपनिवेश की विशेषताएं
पावोना क्लेवस एक विशाल रीफ-निर्माण करने वाली प्रवाल प्रजाति है, जो उष्णकटिबंधीय समुद्री जल में पाई जाती है। कदमत द्वीप के दक्षिण-पूर्वी समुद्री क्षेत्र में स्थित यह उपनिवेश लगभग 5.2 मीटर गहराई से शुरू होकर 20 मीटर तक की ढलान पर फैला हुआ है। यह प्रवाल संरचना न केवल अपने आकार के कारण विशेष है, बल्कि इसकी जीवित अवस्था भी वैज्ञानिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सर्वेक्षण में पाया गया कि इस उपनिवेश का लगभग 58.47 प्रतिशत हिस्सा जीवित प्रवाल ऊतकों से आच्छादित है, जो इसके स्वस्थ पारिस्थितिक स्वरूप को दर्शाता है।
आकार और संभावित आयु
इस प्रवाल उपनिवेश का क्षेत्रफल लगभग 4,250 वर्ग मीटर है, जो एक अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मैदान के लगभग आधे आकार के बराबर माना जाता है। प्रारंभिक वैज्ञानिक अनुमान बताते हैं कि इसकी आयु 700 से 1,800 वर्ष के बीच हो सकती है। हालांकि इसकी वास्तविक आयु निर्धारित करने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक परीक्षण और डेटिंग प्रक्रिया आवश्यक होगी। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह प्रवाल संरचना कई ऐतिहासिक कालखंडों की साक्षी रही होगी और समुद्री पर्यावरण में दीर्घकालिक परिवर्तनों का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड प्रदान कर सकती है।
लक्षद्वीप के प्रवाल पारिस्थितिकी तंत्र का महत्व
लक्षद्वीप भारत का एक केंद्रशासित प्रदेश है, जो अरब सागर में स्थित है। यह भारत की एकमात्र प्रवाल एटोल श्रृंखला है और अपने समृद्ध समुद्री जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहां के प्रवाल भित्तियां, लैगून और एटोल अनेक समुद्री जीवों को आश्रय प्रदान करते हैं। कदमत द्वीप लक्षद्वीप के आबाद द्वीपों में से एक है। इसके आसपास के रीफ तंत्र उथले और गहरे दोनों प्रकार के समुद्री क्षेत्रों में जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समुद्री सर्वेक्षण और अनुसंधान
इस विशाल प्रवाल उपनिवेश की पहचान कदमत द्वीप में किए गए समुद्री जैव विविधता सर्वेक्षण के दौरान हुई। इस अध्ययन में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, रिसर्च एंड एनवायरनमेंटल एजुकेशन फाउंडेशन तथा द हैबिटेट ट्रस्ट से जुड़े वैज्ञानिकों ने भाग लिया। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रकार की खोजें समुद्री संरक्षण नीतियों को मजबूत बनाने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने में मदद करेंगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रवाल उपनिवेश छोटे समुद्री अकशेरुकी जीवों, जिन्हें कोरल पॉलीप कहा जाता है, की लगातार वृद्धि से बनते हैं।
- पावोना क्लेवस कठोर प्रवाल (स्टोनी कोरल) समूह की प्रजाति है, जो कैल्शियम कार्बोनेट का कंकाल बनाती है।
- प्रवाल विरंजन (कोरल ब्लीचिंग) तब होता है जब उच्च तापमान जैसे तनावपूर्ण वातावरण में प्रवाल अपने सहजीवी शैवाल ‘जूज़ैंथेली’ को खो देते हैं।
- लक्षद्वीप भारत की एकमात्र प्रवाल एटोल श्रृंखला है और यह अरब सागर में स्थित है।
फरवरी 2026 में लक्षद्वीप के कल्पेनी द्वीप के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में लगभग 35 प्रवाल प्रजातियों वाला 1.8 किलोमीटर लंबा प्रवाल भित्ति क्षेत्र भी दर्ज किया गया था। ऐसी खोजें यह दर्शाती हैं कि लक्षद्वीप का समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र वैश्विक स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण है। पोटैटो पैच की खोज समुद्री संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को भी उजागर करती है।