मदर डेयरी ने लॉन्च किया भारत का पहला प्राकृतिक रूप से अपघटित होने वाला दूध पाउच

मदर डेयरी ने लॉन्च किया भारत का पहला प्राकृतिक रूप से अपघटित होने वाला दूध पाउच

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मदर डेयरी ने 2 जून 2026 को भारत का पहला प्राकृतिक रूप से अपघटित होने वाला दूध पाउच लॉन्च किया है। इस नई पैकेजिंग का उपयोग 5 जून 2026 से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में शुरू किया जाएगा, जो विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक विशेष पहल मानी जा रही है। शुरुआत में इस पाउच का इस्तेमाल मदर डेयरी के गाय के दूध (काउ मिल्क) उत्पाद के लिए किया जाएगा। यह नवाचार प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने और टिकाऊ पैकेजिंग समाधानों को बढ़ावा देने की दिशा में भारतीय डेयरी उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

मदर डेयरी और एनडीडीबी का योगदान

मदर डेयरी, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। कंपनी देश के विभिन्न राज्यों में प्रतिदिन लगभग 55 लाख लीटर दूध का विपणन करती है। नई अपघटित होने वाली पैकेजिंग तकनीक विकसित करने के लिए मदर डेयरी ने चार वर्षों से अधिक समय तक अनुसंधान और परीक्षण कार्य किया। इस लंबे शोध प्रयास का उद्देश्य ऐसा पैकेजिंग समाधान तैयार करना था जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा भी बनाए रख सके।

नई अपघटित पैकेजिंग तकनीक कैसे काम करती है?

नया दूध पाउच विशेष सामग्री से तैयार किया गया है, जो समय के साथ जैव-उपलब्ध मोम (बायोएवेलेबल वैक्स) में परिवर्तित हो जाता है। मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव इस मोम को धीरे-धीरे प्राकृतिक तत्वों में विघटित कर देते हैं। इस प्रक्रिया में कुछ वर्ष लग सकते हैं, लेकिन अंततः यह पैकेजिंग पर्यावरण में स्थायी प्लास्टिक कचरा छोड़ने के बजाय प्राकृतिक रूप से समाप्त हो जाती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पाउच पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) योग्य भी है, जिससे इसके उपयोग के बाद संसाधनों का पुनः उपयोग संभव हो सकेगा।

उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त बोझ

मदर डेयरी ने स्पष्ट किया है कि नई पैकेजिंग तकनीक अपनाने के बावजूद दूध की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की जाएगी। इससे उपभोक्ताओं को पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद का लाभ बिना अतिरिक्त लागत के मिलेगा। प्रारंभिक चरण में यह सुविधा केवल दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में उपलब्ध होगी और इसे सबसे पहले कंपनी के गाय के दूध उत्पाद में लागू किया जाएगा। भविष्य में इसकी सफलता के आधार पर अन्य उत्पादों और क्षेत्रों में भी इसका विस्तार किया जा सकता है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

भारत में दूध की खुदरा बिक्री के लिए प्लास्टिक पाउच का व्यापक उपयोग होता है। ऐसे में अपघटित होने वाली पैकेजिंग का विकास प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विशेष रूप से उन प्लास्टिक उत्पादों के संदर्भ में, जो कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण प्रणालियों से बाहर निकलकर पर्यावरण में फैल जाते हैं, इस प्रकार की तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। यह पहल सतत विकास, स्वच्छ पर्यावरण और जिम्मेदार उपभोग की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • विश्व पर्यावरण दिवस प्रत्येक वर्ष 5 जून को मनाया जाता है।
  • राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की स्थापना वर्ष 1965 में हुई थी।
  • भारत में तरल दूध की खुदरा बिक्री के लिए दूध पाउच सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले पैकेजिंग माध्यमों में से एक हैं।
  • “फ्यूजिटिव प्लास्टिक” ऐसे प्लास्टिक कचरे को कहा जाता है जो औपचारिक कचरा संग्रहण और पुनर्चक्रण प्रणाली से बाहर निकलकर पर्यावरण में पहुंच जाता है।

मदर डेयरी का यह नया कदम भारतीय डेयरी उद्योग में पर्यावरण-अनुकूल नवाचार का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यदि यह पहल सफल रहती है, तो भविष्य में अन्य खाद्य और उपभोक्ता उत्पाद कंपनियां भी इसी प्रकार की टिकाऊ पैकेजिंग तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो सकती हैं। इससे प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने और हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

Originally written on June 2, 2026 and last modified on June 2, 2026.

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