राजस्थान में मिली नई छिपकली प्रजाति मेसालिना बिश्नोई
भारत की जैव विविधता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में राजस्थान से छिपकली की एक नई प्रजाति मेसालिना बिश्नोई की पहचान की गई है। यह भारत में Mesalina वंश की पहली आधिकारिक और वैज्ञानिक रूप से पुष्टि की गई उपस्थिति मानी जा रही है। इस नई प्रजाति का औपचारिक वैज्ञानिक विवरण 1 जून 2026 को प्रकाशित किया गया। यह खोज राजस्थान के बीकानेर जिले के गजनेर क्षेत्र के निकट स्थित अर्ध-मरुस्थलीय आवास में किए गए सर्वेक्षण के दौरान सामने आई। इस खोज ने भारत के सरीसृप विज्ञान और मरुस्थलीय जैव विविधता के अध्ययन में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
वर्गीकरण और वैज्ञानिक पहचान
मेसालिना बिश्नोई, Mesalina वंश की एक नई प्रजाति है और इसे Mesalina watsonana प्रजाति समूह के अंतर्गत रखा गया है। वैज्ञानिकों ने इसकी पहचान के लिए विस्तृत आकारिकी (मॉर्फोलॉजिकल) अध्ययन तथा आनुवंशिक विश्लेषण का उपयोग किया। दोनों प्रकार के परीक्षणों से यह स्पष्ट हुआ कि यह पहले से ज्ञात किसी भी प्रजाति से भिन्न है और विज्ञान के लिए एक नई प्रजाति का प्रतिनिधित्व करती है। नई प्रजातियों की पहचान में आनुवंशिक तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है, जिससे जीवों के विकासक्रम और उनके आपसी संबंधों को अधिक सटीकता से समझा जा सकता है।
खोज का स्थान और सर्वेक्षण
इस प्रजाति का नमूना अगस्त 2025 में किए गए एक क्षेत्रीय सर्वेक्षण के दौरान एकत्र किया गया था। सर्वेक्षण स्थल राजस्थान के पश्चिमी भाग में स्थित गजनेर के निकट एक खुला अर्ध-मरुस्थलीय क्षेत्र था। यह क्षेत्र थार मरुस्थल के व्यापक शुष्क पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है। थार क्षेत्र अपने विशिष्ट जलवायु और अनुकूलित जीव-जंतुओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां की कठोर परिस्थितियों में जीवित रहने वाले जीवों में अनेक ऐसी प्रजातियां शामिल हैं जिनका वैज्ञानिक अध्ययन अभी भी जारी है।
प्रजाति की विशेषताएं और नामकरण
मेसालिना बिश्नोई आकार में छोटी छिपकली है, जिसकी स्नाउट-वेंट लंबाई लगभग 39.2 मिलीमीटर दर्ज की गई है। इसका शरीर धूसर से जैतूनी-भूरे रंग का होता है तथा शरीर पर विशिष्ट धारियां और चिह्न पाए जाते हैं, जो इसे अन्य संबंधित प्रजातियों से अलग पहचान देते हैं। इस प्रजाति का नाम “बिश्नोई” भारत के प्रसिद्ध बिश्नोई समुदाय के सम्मान में रखा गया है। बिश्नोई समाज सदियों से वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के लिए जाना जाता है। राजस्थान में पेड़ों और वन्य जीवों की रक्षा के लिए इस समुदाय के योगदान को व्यापक रूप से सराहा जाता है।
वैज्ञानिक महत्व और ऐतिहासिक संदर्भ
इस खोज का महत्व केवल नई प्रजाति की पहचान तक सीमित नहीं है। वर्ष 1935 में प्रसिद्ध प्राणी विज्ञानी मैल्कम ए. स्मिथ ने जैसलमेर क्षेत्र में Mesalina watsonana की संभावित उपस्थिति का उल्लेख किया था, लेकिन उस समय कोई प्रमाणित नमूना उपलब्ध नहीं था। वर्तमान खोज ने पहली बार भारत में Mesalina वंश की उपस्थिति को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया है। यह खोज भारतीय मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र की समृद्ध जैव विविधता को भी उजागर करती है और भविष्य में इस क्षेत्र में और अधिक शोध की संभावनाओं को बढ़ाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाला प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान है।
- Mesalina वंश, Lacertidae परिवार का हिस्सा है, जिसमें पुरानी दुनिया की अनेक छिपकली प्रजातियां शामिल हैं।
- थार मरुस्थल भारत का सबसे बड़ा मरुस्थलीय क्षेत्र है और राजस्थान के बड़े हिस्से में फैला हुआ है।
- मैल्कम ए. स्मिथ भारतीय उपमहाद्वीप में सरीसृपों और उभयचरों के अध्ययन के लिए प्रसिद्ध ब्रिटिश प्राणी विज्ञानी थे।
मेसालिना बिश्नोई की खोज भारत की जैव विविधता अनुसंधान यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह न केवल राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों की पारिस्थितिक समृद्धि को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि अभी भी देश के कई क्षेत्रों में ऐसी प्रजातियां मौजूद हैं जिनकी वैज्ञानिक पहचान होना बाकी है। इस प्रकार की खोजें संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने और प्राकृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।