रूस से कच्चे तेल आयात के लिए भारत ने अमेरिका से मांगी छूट अवधि बढ़ाने की मांग
भारत ने अमेरिका से उस छूट अवधि को बढ़ाने का अनुरोध किया है, जिसके तहत पहले से जहाजों पर लदे रूसी कच्चे तेल के आयात की अनुमति दी गई थी। यह अनुरोध ऐसे समय में आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 75 दिनों से व्यवधान बना हुआ है और ब्रेंट क्रूड की कीमतें 2 मार्च से 9 मार्च 2026 के बीच 80 डॉलर से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
रूसी तेल आयात और अमेरिकी छूट
अमेरिका द्वारा भारत को दी गई वर्तमान अनुमति केवल उन रूसी कच्चे तेल खेपों पर लागू है जो पहले से जहाजों पर लदी हुई हैं। यह अनुमति 16 मई 2026 को समाप्त होने वाली है। यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में अमेरिका लगातार भारत से रियायती रूसी तेल खरीद कम करने का आग्रह करता रहा है। हालांकि रूस के तेल पर अमेरिका द्वारा पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, लेकिन कुछ लेनदेन और कंपनियों पर प्रतिबंधात्मक प्रावधान लागू हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का वैश्विक महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और एलएनजी परिवहन मार्गों में गिना जाता है। इस मार्ग में किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक तेल आपूर्ति, माल ढुलाई लागत और क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित करता है। हालिया तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।
भारत की ऊर्जा स्थिति
अमेरिकी छूट समाप्त होने की समयसीमा से पहले भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल आयात में वृद्धि की। क्लेपलर के आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में भारत ने प्रतिदिन लगभग 23 लाख बैरल रूसी कच्चे तेल का आयात किया। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 14 मई 2026 को बताया कि भारत के पास 69 दिनों के लिए कच्चे तेल और एलएनजी का भंडार उपलब्ध है, जबकि एलपीजी का स्टॉक 45 दिनों के लिए पर्याप्त है।
ऊर्जा और प्रतिबंधों का व्यापक संदर्भ
भारत ने अप्रैल 2026 में रूस द्वारा प्रस्तावित ऐसे एलएनजी कार्गो को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आते थे। इसके अलावा 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए ईरान संघर्ष का असर भारत के तेल और उर्वरक आयात लागत पर भी पड़ा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर मार्ग से जोड़ता है।
- ब्रेंट क्रूड अंतरराष्ट्रीय तेल मूल्य निर्धारण का प्रमुख मानक माना जाता है।
- एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस को परिवहन के लिए लगभग माइनस 162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जाता है।
- क्लेपलर वैश्विक कमोडिटी और शिपिंग प्रवाह को ट्रैक करने वाली डेटा एवं विश्लेषण कंपनी है।
भारत की यह पहल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच स्थिर आपूर्ति बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियां भारत की ऊर्जा नीति और आयात रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं।