केंद्र सरकार ने कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी
केंद्र सरकार ने 13 मई 2026 को सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य कोयले और लिग्नाइट को स्वच्छ औद्योगिक ईंधन तथा रासायनिक उत्पादों में बदलने वाली परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना है। इसमें वित्तीय प्रोत्साहन, प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया और चरणबद्ध भुगतान की व्यवस्था शामिल की गई है।
कोयला गैसीकरण क्या है
कोयला गैसीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कोयले या लिग्नाइट को उच्च तापमान पर आंशिक ऑक्सीकरण के माध्यम से सिंथेसिस गैस यानी सिंगैस में बदला जाता है। इस सिंगैस में मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और जलवाष्प शामिल होते हैं। इसका उपयोग रसायन, उर्वरक, ईंधन और औद्योगिक गैसों के निर्माण में किया जाता है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं
सरकार की इस योजना के तहत लगभग 75 मिलियन टन कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण को समर्थन दिया जाएगा। इससे 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होने और करीब 50,000 रोजगार सृजित होने की संभावना है। भारत ने वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है। वित्तीय सहायता के तहत किसी परियोजना को संयंत्र और मशीनरी लागत का अधिकतम 20 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जाएगा। प्रति परियोजना प्रोत्साहन सीमा 5,000 करोड़ रुपये तय की गई है।
उर्वरक और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ाव
भारत वर्तमान में अपनी आवश्यकताओं के लिए 50 प्रतिशत से अधिक एलएनजी, लगभग 20 प्रतिशत यूरिया, लगभग 100 प्रतिशत अमोनिया और 80 से 90 प्रतिशत मेथेनॉल का आयात करता है। कोयला गैसीकरण परियोजनाओं से मेथेनॉल, अमोनिया और सिंथेटिक नेचुरल गैस जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जिनका उपयोग उर्वरक, रसायन और ऊर्जा क्षेत्रों में किया जाता है। इससे आयात निर्भरता कम करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
नीति ढांचा और तकनीकी समर्थन
सरकार ने इस योजना को तकनीक-निरपेक्ष रखा है, जिससे विभिन्न प्रकार की स्वदेशी गैसीकरण तकनीकों को बढ़ावा मिल सके। इसके अलावा गैर-विनियमित क्षेत्र लिंकिंग नीलामी ढांचे के तहत कोयला आपूर्ति की अवधि को 30 वर्ष तक बढ़ा दिया गया है। इससे उद्योगों को दीर्घकालिक कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कोयला गैसीकरण में ठोस कोयले को सिंगैस में परिवर्तित किया जाता है।
- लिग्नाइट कम गुणवत्ता वाला कोयला होता है, जिसमें नमी की मात्रा अधिक होती है।
- सिंथेटिक नेचुरल गैस प्राकृतिक गैस का विकल्प है, जिसे कोयला गैसीकरण से बनाया जा सकता है।
- भारत ने वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है।
यह योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और आयात निर्भरता कम करने की रणनीति में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में कोयला गैसीकरण तकनीक देश के उर्वरक, रसायन और ऊर्जा क्षेत्रों को नई दिशा दे सकती है।