असम कैबिनेट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक के मसौदे को दी मंजूरी

असम कैबिनेट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक के मसौदे को दी मंजूरी

असम कैबिनेट ने 13 मई 2026 को यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। प्रस्तावित विधेयक को 26 मई 2026 को असम विधानसभा में पेश किया जाएगा। विधानसभा का सत्र 21 मई से शुरू होकर 26 मई तक चलेगा।

यूनिफॉर्म सिविल कोड क्या है

यूनिफॉर्म सिविल कोड एक ऐसी प्रस्तावित कानूनी व्यवस्था है, जिसके तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और अन्य निजी नागरिक मामलों के लिए समान कानून लागू किए जाते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में यूसीसी को राज्य के नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत रखा गया है। इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून व्यवस्था की दिशा में कार्य करना है।

असम के मसौदा विधेयक के प्रमुख प्रावधान

असम के प्रस्तावित यूसीसी विधेयक में विवाह और तलाक का पंजीकरण, बहुविवाह पर रोक, लड़कियों के संपत्ति अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियम शामिल किए गए हैं। हालांकि राज्य के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों की जनजातीय समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा पारंपरिक रीति-रिवाज, धार्मिक अनुष्ठान और स्थानीय परंपराओं को भी प्रस्तावित कानून से छूट दी गई है।

असम में विधायी प्रक्रिया

असम विधानसभा राज्य की एकसदनीय विधायिका है। किसी विधेयक को कानून बनने के लिए विधानसभा में पारित होने के बाद राज्यपाल की स्वीकृति आवश्यक होती है। यह विधेयक 21 मई से 26 मई 2026 तक चलने वाले बजट सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

यूसीसी और अन्य राज्यों की स्थिति

उत्तराखंड वर्ष 2024 में यूनिफॉर्म सिविल कोड कानून लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बना था। इसके बाद गुजरात ने भी यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति गठित की। असम अब उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूसीसी विधेयक पेश करने वाला तीसरा राज्य बन गया है।

राजनीतिक और संवैधानिक संदर्भ

भारतीय जनता पार्टी ने असम विधानसभा चुनाव 2026 के अपने घोषणापत्र में यूसीसी लागू करने का वादा किया था। प्रस्तावित कानून केवल नागरिक मामलों से संबंधित है और इसका संबंध आपराधिक कानून से नहीं है। यह मुद्दा लंबे समय से भारत में संवैधानिक, सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अनुच्छेद 44 भारतीय संविधान के भाग-4 में नीति निदेशक तत्वों के अंतर्गत शामिल है।
  • उत्तराखंड यूसीसी कानून लागू करने वाला भारत का पहला राज्य है।
  • असम विधानसभा एकसदनीय विधायिका है।
  • यूसीसी का संबंध विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों से है।

असम सरकार का यह कदम राज्य में समान नागरिक कानून व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इस विधेयक पर राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी स्तर पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।

Originally written on May 15, 2026 and last modified on May 15, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *