कर्नाटक ने शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक प्रतीकों पर बदला नियम
कर्नाटक सरकार ने 13 मई 2026 को 5 फरवरी 2022 के उस आदेश को वापस ले लिया, जिसके तहत शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रभावी प्रतिबंध लगाया गया था। नए आदेश के अनुसार अब निर्धारित स्कूल यूनिफॉर्म के साथ सीमित पारंपरिक और आस्था आधारित प्रतीकों को पहनने की अनुमति दी गई है। यह आदेश राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी शिक्षण संस्थानों में कक्षा 1 से 12 तक लागू होगा।
नए आदेश का दायरा
संशोधित आदेश कर्नाटक के स्कूलों और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों पर लागू होगा। इसके तहत छात्र अब यूनिफॉर्म के साथ हिजाब या हेडस्कार्फ, पगड़ी, जनेऊ, शिवधारा और रुद्राक्ष पहन सकेंगे। सरकार का कहना है कि यह निर्णय सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के सम्मान के साथ शैक्षणिक अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
किन शर्तों के साथ मिली अनुमति
नए नियम के अनुसार धार्मिक या पारंपरिक प्रतीकों की अनुमति तभी होगी जब वे संस्थान के अनुशासन, सुरक्षा, पहचान प्रक्रिया या शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा न डालें। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया है कि ये प्रतीक निर्धारित यूनिफॉर्म के पूरक होने चाहिए, न कि उसके स्थान पर अलग पहचान के रूप में।
2022 के आदेश की पृष्ठभूमि
5 फरवरी 2022 को जारी आदेश के बाद कर्नाटक के कई शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने पर विवाद शुरू हुआ था। इस मुद्दे पर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और मामला न्यायालय तक पहुंचा। बाद में सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई, जहां विभाजित फैसला आया था। इसके बाद यह विषय लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बना रहा।
राजनीतिक संदर्भ
यह नया आदेश कर्नाटक के स्कूल शिक्षा और साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने बेंगलुरु में घोषित किया। यह निर्णय कांग्रेस पार्टी के उस रुख के अनुरूप माना जा रहा है, जिसमें उसने 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान पूर्व प्रतिबंध का विरोध किया था। सरकार का कहना है कि नई नीति सभी समुदायों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान करते हुए शिक्षा व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने का प्रयास है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- हिजाब कुछ मुस्लिम महिलाओं द्वारा धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के रूप में पहना जाने वाला सिर ढकने का वस्त्र है।
- पगड़ी सिख पहचान से जुड़ी हुई है और भारत में विभिन्न रूपों में पहनी जाती है।
- जनेऊ हिंदू धार्मिक परंपरा से जुड़ा पवित्र धागा है।
- रुद्राक्ष की माला हिंदू धार्मिक साधना और पूजा-पाठ में उपयोग की जाती है।
कर्नाटक सरकार का यह फैसला शिक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इस निर्णय का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है।