राष्ट्रीय पुल स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली को केंद्रीकृत करेगी केंद्र सरकार

राष्ट्रीय पुल स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली को केंद्रीकृत करेगी केंद्र सरकार

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित पुलों की निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्रीय पुल स्वास्थ्य निगरानी सॉफ्टवेयर को केंद्रीकृत करने की योजना बनाई है। इस पहल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह प्रणाली ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (BHMS) से जुड़ी है, जिसमें सेंसरों की सहायता से पुलों की वास्तविक समय (रियल-टाइम) में निगरानी की जाती है। इस कदम का उद्देश्य पुलों की सुरक्षा बढ़ाना और संभावित जोखिमों का समय रहते पता लगाना है।

क्या है ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम?

ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम एक सेंसर-आधारित तकनीकी ढांचा है, जिसका उपयोग पुलों की संरचनात्मक स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए किया जाता है। पुल के विभिन्न हिस्सों पर लगाए गए सेंसर गति, कंपन, दबाव, तनाव और अन्य तकनीकी मापदंडों से संबंधित डेटा एकत्र करते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर पुल की मजबूती और उसकी वर्तमान स्थिति का आकलन किया जाता है, जिससे किसी संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके।

मानकीकृत निविदा प्रक्रिया लागू होगी

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि भविष्य में पुलों के लिए सेंसरों की आपूर्ति, स्थापना और रखरखाव का कार्य अलग-अलग प्रतिस्पर्धी निविदाओं के माध्यम से कराया जाएगा। इसके लिए मॉडल रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) तैयार किया गया है। जिन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में अभी भौतिक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है, वहां ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम से जुड़े पुराने प्रावधान हटाकर नई निविदाएं जारी की जाएंगी। इसका उद्देश्य तकनीकी मानकों में एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

डिजिटल इन्वेंट्री और विभिन्न एजेंसियों की भूमिका

मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल), सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और विभिन्न राज्यों के लोक निर्माण विभागों को 30 सितंबर 2026 तक देशभर के पुलों का डिजिटल सर्वेक्षण पूरा करने का निर्देश दिया है। जिन परियोजनाओं में सेंसर लगाने का कार्य पहले ही शुरू हो चुका है, वे मौजूदा अनुबंधों के अनुसार कार्य जारी रख सकेंगी, लेकिन उन्हें 30 दिनों के भीतर मंत्रालय के मानक एवं अनुसंधान प्रकोष्ठ को सभी आवश्यक विवरण उपलब्ध कराने होंगे।

केंद्रीकृत डेटा विश्लेषण से बढ़ेगी सुरक्षा

नई व्यवस्था के तहत विभिन्न पुलों से प्राप्त सेंसर डेटा का विश्लेषण एक केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा। इस कार्य में आईआईटी मद्रास और सी-डैक सॉफ्टवेयर प्रबंधन तथा डेटा विश्लेषण की जिम्मेदारी निभाएंगे। इससे पूरे देश के पुलों की निगरानी एक समान प्रणाली के माध्यम से संभव होगी और किसी भी संरचनात्मक कमजोरी का समय रहते पता लगाकर आवश्यक मरम्मत की जा सकेगी। यह पहल पुलों की सुरक्षा और दीर्घकालिक रखरखाव को अधिक प्रभावी बनाएगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • गुजरात में मोरबी सस्पेंशन ब्रिज दुर्घटना अक्टूबर 2022 में हुई थी।
  • गुजरात के गांभीरा पुल का हादसा जुलाई 2025 में हुआ था।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है।
  • सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) देश के रणनीतिक सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क और पुल निर्माण का कार्य करता है।

राष्ट्रीय पुल स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली का केंद्रीकरण भारत के सड़क अवसंरचना प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण सुधार है। आधुनिक सेंसर तकनीक, डिजिटल डेटा विश्लेषण और वैज्ञानिक निगरानी के माध्यम से यह पहल पुलों की सुरक्षा को मजबूत करेगी, दुर्घटनाओं की संभावना कम करेगी और देश के परिवहन नेटवर्क को अधिक विश्वसनीय एवं सुरक्षित बनाएगी।

Originally written on July 9, 2026 and last modified on July 9, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *