इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बेसिक कस्टम ड्यूटी में दी बड़ी राहत

इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बेसिक कस्टम ड्यूटी में दी बड़ी राहत

भारत सरकार ने 9 जुलाई 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए डिस्प्ले असेंबली, लिथियम-आयन सेल और इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल के निर्माण में उपयोग होने वाले कई आयातित सामानों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (बीसीडी) को समाप्त कर दिया। यह छूट इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न इनपुट और मशीनरी पर लागू होगी तथा 31 मार्च 2029 तक प्रभावी रहेगी। इस कदम का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण लागत को कम करना, निवेश को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण केंद्र के रूप में मजबूत बनाना है।

बेसिक कस्टम ड्यूटी क्या है?

बेसिक कस्टम ड्यूटी (Basic Customs Duty) सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत भारत में आयात होने वाले सामान पर लगाया जाने वाला प्रमुख शुल्क है। यह सरकार के राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत होने के साथ-साथ व्यापार नीति का भी एक प्रभावी साधन है। जब सरकार इस शुल्क में छूट देती है, तो आयातित कच्चे माल और पुर्जों की लागत कम हो जाती है, जिससे घरेलू कंपनियों के लिए उत्पादन सस्ता और अधिक प्रतिस्पर्धी बन जाता है।

किन उत्पादों और पुर्जों को मिलेगा लाभ?

नई अधिसूचना के तहत स्मार्टफोन, लैपटॉप, वियरेबल डिवाइस, स्मार्ट टीवी, ऑटोमोबाइल सिस्टम, चिकित्सा उपकरण और औद्योगिक उपयोग में आने वाले डिस्प्ले मॉड्यूल असेंबली के निर्माण में प्रयुक्त सामानों को शुल्क छूट का लाभ मिलेगा। इसके अलावा स्मार्टफोन के वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल में उपयोग होने वाले एनएफसी कॉइल और नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) मैग्नेट को भी इस छूट के दायरे में शामिल किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और लिथियम-आयन बैटरी निर्माण में प्रयुक्त निर्दिष्ट मशीनरी, उपकरण और अन्य आवश्यक घटकों पर भी यह राहत लागू होगी।

घरेलू विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा

इस निर्णय को लागू करने के लिए वित्त मंत्रालय ने तीन अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी की हैं। यह कदम केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों और उनके घटकों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। सरकार का लक्ष्य आयात पर निर्भरता कम करते हुए भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

उद्योग और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (ईएमएस) कंपनियां और लिथियम-आयन सेल निर्माता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस शुल्क छूट से स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी, वियरेबल डिवाइस और बैटरी आधारित उत्पादों के निर्माण की लागत कम होगी। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन और ऊर्जा भंडारण प्रणाली जैसे उभरते क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिलेगा। यह नीति घरेलू उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • बेसिक कस्टम ड्यूटी (बीसीडी) भारत में आयातित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला प्रमुख सीमा शुल्क है।
  • डिस्प्ले असेंबली का उपयोग उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल सिस्टम और चिकित्सा उपकरणों में किया जाता है।
  • लिथियम-आयन सेल स्मार्टफोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।
  • NdFeB (नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन) मैग्नेट कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरणों में प्रयुक्त शक्तिशाली स्थायी चुंबक होते हैं।

बेसिक कस्टम ड्यूटी में यह छूट भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन है। इससे उत्पादन लागत घटेगी, घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक्स एवं बैटरी निर्माण क्षेत्र को नई गति मिलेगी।

Originally written on July 9, 2026 and last modified on July 9, 2026.

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