राजस्थान का 2047 जल रोडमैप: पानी, सिंचाई और संरक्षण पर दीर्घकालिक फोकस

राजस्थान का 2047 जल रोडमैप: पानी, सिंचाई और संरक्षण पर दीर्घकालिक फोकस

राजस्थान ने 24 जुलाई 2026 को राजस्थान राज्य जल योजना 2047 की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य राज्य की दीर्घकालिक जल जरूरतों के लिए एक समग्र ढांचा तैयार करना है। इस योजना में नदी-जोड़ परियोजनाओं, भूजल संरक्षण, जल-संरक्षण उपायों और जनभागीदारी को केंद्र में रखा गया है। रेगिस्तानी और अर्ध-शुष्क भूभाग वाले राजस्थान के लिए यह पहल इसलिए अहम है, क्योंकि यहां जल प्रबंधन केवल आपूर्ति का नहीं, बल्कि टिकाऊ संसाधन प्रबंधन का भी सवाल है।

राजस्थान के जल प्रबंधन की पृष्ठभूमि

राज्य में पानी की उपलब्धता हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है। पश्चिमी राजस्थान के कई हिस्सों में नहरों, भूजल पुनर्भरण और वर्षा जल-संग्रह पर निर्भरता अधिक है। इसी संदर्भ में इंदिरा गांधी नहर परियोजना राज्य की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई और पेयजल प्रणालियों में गिनी जाती है, जो पश्चिमी जिलों तक पानी पहुंचाती है। नई जल योजना 2047 इसी मौजूदा ढांचे को आगे बढ़ाते हुए भविष्य की जरूरतों के अनुरूप समाधान तलाशती है।

बड़ी परियोजनाओं पर सरकार का जोर

नई योजना के साथ राज्य ने कई प्रमुख पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं को भी रेखांकित किया है। इनमें रामजल सेतु लिंक परियोजना प्रमुख है, जिसके जरिए 17 जिलों को पेयजल और लगभग 4.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा देने की योजना है। इसके अलावा यमुना जल समझौते के तहत 23 जून 2026 को अंतिम रूप दिए गए प्रावधानों के अनुसार 1,917 क्यूसेक यमुना जल 295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से शेखावाटी क्षेत्र तक पहुंचेगा। यह परियोजना सीकर, झुंझुनूं और चूरू जैसे जिलों के लिए खास महत्व रखती है, जहां जल संकट लंबे समय से चिंता का विषय रहा है।

शहरी और ग्रामीण जल आपूर्ति पर समान फोकस

राज्य सरकार ने AMRUT 2.0 के तहत 178 शहरी स्थानीय निकायों में पेयजल ढांचे के लिए 5,100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। 24 जुलाई 2026 तक 109 शहरी स्थानीय निकायों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके थे। वहीं जल जीवन मिशन के तहत राजस्थान के 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंच रहा है। इससे स्पष्ट है कि योजना केवल बड़े प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरी और ग्रामीण दोनों स्तरों पर जल सेवाओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • जल जीवन मिशन की शुरुआत भारत सरकार ने 2019 में ग्रामीण घरों तक नल से जल पहुंचाने के लिए की थी।
  • AMRUT का पूरा नाम Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation है।
  • क्यूसेक जल प्रवाह की इकाई है, जो एक घन फुट प्रति सेकंड के बराबर होती है।
  • अटल भूजल योजना भूजल प्रबंधन और समुदाय की भागीदारी पर आधारित कार्यक्रम है।

जल संरक्षण और निगरानी की नई व्यवस्था

राज्य में जल संरक्षण अभियान 2 जनवरी 2026 को 500 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू किया गया था। इसके तहत वर्षा जल-संग्रह, पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन, चेक डैम निर्माण और बावड़ियों के पुनर्स्थापन जैसे काम शामिल हैं। साथ ही, सिंचाई परियोजनाओं की निगरानी के लिए मुख्यमंत्री सिंचाई टास्क फोर्स का गठन किया गया है। किसानों को सिंचाई जल की उपलब्धता की जानकारी देने के लिए किसान साथी ऐप भी उपयोग में लाया जा रहा है।

उदयपुर और भूजल प्रबंधन से जुड़े कदम

उदयपुर के लिए देवास III और देवास IV पेयजल परियोजनाओं पर भी काम जारी है, जिनकी अनुमानित लागत 1,691 करोड़ रुपये है। दूसरी ओर, अटल भूजल योजना के तहत 24 जुलाई 2026 तक 485 करोड़ रुपये के जल संरक्षण कार्य पूरे किए जा चुके थे। यह संकेत देता है कि राज्य सरकार बड़े जल-आधारित ढांचे के साथ-साथ भूजल रिचार्ज और स्थानीय जलस्रोतों के संरक्षण को भी समान महत्व दे रही है। कुल मिलाकर, राजस्थान राज्य जल योजना 2047 राज्य के लिए एक दीर्घकालिक जल रणनीति का संकेत है। इसमें पेयजल, सिंचाई, भूजल और जनभागीदारी—चारों मोर्चों को जोड़कर जल सुरक्षा की दिशा में एक व्यापक प्रयास किया गया है।

Originally written on July 25, 2026 and last modified on July 25, 2026.

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