दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों का उन्नयन पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को नई मजबूती देगा
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने देशभर में दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी के रूप में उन्नत करने की मंजूरी दी है। इस कदम का उद्देश्य छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों तक पोषण, देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है। यह उन्नयन मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत किया जा रहा है, जो आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण अभियान और किशोरियों के लिए योजना को एक साथ जोड़ता है।
सक्षम आंगनवाड़ी क्या हैं और क्यों महत्वपूर्ण हैं
आंगनवाड़ी केंद्र ग्रामीण और शहरी बस्तियों में बच्चों तथा माताओं के लिए आधारभूत सेवा केंद्र होते हैं। इन केंद्रों के जरिए पूरक पोषण, स्वास्थ्य जागरूकता, टीकाकरण सहयोग और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल जैसी सेवाएं दी जाती हैं। सक्षम आंगनवाड़ी इन्हीं केंद्रों का उन्नत रूप हैं, जिनमें बेहतर ढांचा, सीखने की सामग्री और बच्चों के अनुकूल वातावरण विकसित किया जाता है। इन केंद्रों में एलईडी स्क्रीन, जल शोधन प्रणाली, पोषण वाटिका, ईसीसीई सामग्री और बिल्डिंग ऐज लर्निंग एड जैसी सुविधाएं जोड़ी जाती हैं। इससे आंगनवाड़ी केवल पोषण वितरण स्थल नहीं रहती, बल्कि बच्चों के सीखने और विकास का सक्रिय केंद्र बनती है।
मिशन पोषण 2.0 की कार्यप्रणाली
मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका फोकस पोषण सहायता, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा, और सेवा वितरण की गुणवत्ता सुधारने पर है। यह योजना छह वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और 14 से 18 वर्ष की किशोरियों को लक्षित करती है, विशेषकर आकांक्षी जिलों और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में। योजना के संचालन में डिजिटल निगरानी को भी अहम स्थान दिया गया है। पोषण ट्रैकर ऐप के जरिए केंद्रों, कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों की वास्तविक समय में निगरानी की जाती है। इसके साथ आधार-आधारित सत्यापन और चेहरे की पहचान प्रणाली के माध्यम से टेक-होम राशन वितरण की व्यवस्था भी शामिल है।
राज्यों में उन्नयन की स्थिति और हालिया प्रगति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 25 मार्च 2026 तक 1,04,403 आंगनवाड़ी केंद्रों को सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों में बदला जा चुका था। अब दो लाख केंद्रों की नई मंजूरी से इस अभियान को बड़ा विस्तार मिलेगा। राज्यवार मंजूरियों में मध्य प्रदेश के 24,662, उत्तर प्रदेश के 23,697, कर्नाटक के 17,732, झारखंड के 16,775 और ओडिशा के 12,140 केंद्र शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर को 338 केंद्रों की मंजूरी मिली है। वित्त वर्ष 2025-26 में मिशन पोषण 2.0 के लिए 21,960 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसके अलावा 16 मार्च 2026 तक 10 लाख से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण भी पढ़ाई भी पहल के तहत प्रशिक्षित किया जा चुका था। योजना की प्रभावशीलता पर नीतिगत समीक्षा के लिए नीति आयोग ने 2020 और 2025 में तृतीय-पक्ष मूल्यांकन और प्रभाव आकलन भी कराया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आंगनवाड़ी केंद्र एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) ढांचे का हिस्सा हैं।
- सक्षम आंगनवाड़ी में पोषण के साथ प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाता है।
- पोषण ट्रैकर ऐप का उपयोग केंद्रों और लाभार्थियों की डिजिटल निगरानी के लिए किया जाता है।
- मिशन पोषण 2.0 में आंगनवाड़ी सेवाएं, पोषण अभियान और किशोरियों के लिए योजना को एकीकृत किया गया है।
दो लाख आंगनवाड़ी केंद्रों का यह उन्नयन ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में पोषण सेवाओं की पहुंच, गुणवत्ता और निगरानी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बच्चों की शुरुआती देखभाल और मातृ-स्वास्थ्य सेवाओं को भी अधिक व्यवस्थित आधार मिलने की उम्मीद है।