रसायन उद्योग को नई रफ्तार, सरकार ने भव्य रसायन योजना (BHAVYA Rasayan Scheme) को मंजूरी दी

रसायन उद्योग को नई रफ्तार, सरकार ने भव्य रसायन योजना (BHAVYA Rasayan Scheme) को मंजूरी दी

केंद्र सरकार ने 24 जुलाई 2026 को भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन यानी BHAVYA Rasayan Scheme को मंजूरी दी। इस योजना के तहत देश में तीन समर्पित रसायन पार्क विकसित किए जाएंगे, जिनके लिए कुल ₹3,030 करोड़ का प्रावधान किया गया है। योजना का उद्देश्य रसायन क्षेत्र के लिए साझा बुनियादी ढांचा, उपयोगी सुविधाएं और प्रशासनिक समर्थन उपलब्ध कराना है, ताकि औद्योगिक उत्पादन को अधिक संगठित और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।

योजना का ढांचा और वित्तीय प्रावधान

BHAVYA का पूरा नाम Bharat Audyogik Vikas Yojana Rasayan है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी। कुल बजट में से ₹3,000 करोड़ पार्कों के भीतर बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च किए जाएंगे, जबकि ₹30 करोड़ प्रशासनिक व्यय के लिए रखे गए हैं।सरकार की योजना के अनुसार, प्रत्येक रसायन पार्क के लिए अधिकतम ₹1,000 करोड़ तक की केंद्रीय सहायता दी जाएगी। यह सहायता तभी मिलेगी जब संबंधित राज्य सरकार कम से कम ₹500 करोड़ का योगदान दे। इससे केंद्र और राज्यों के बीच साझा जिम्मेदारी का मॉडल बनता है।

राज्यों की भूमिका और चयन प्रक्रिया

इन रसायन पार्कों का विकास राज्य सरकारें करेंगी, लेकिन चयन प्रक्रिया चुनौती-आधारित होगी। इसका अर्थ है कि राज्यों को तय मानकों के आधार पर प्रतिस्पर्धा करनी होगी और बेहतर प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जाएगी।प्रत्येक पार्क के लिए कम से कम 2,000 एकड़ या 8 वर्ग किलोमीटर का एकसाथ जुड़ा हुआ और किसी भी कानूनी बाधा से मुक्त भूमि क्षेत्र जरूरी होगा। यह शर्त इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि बड़े औद्योगिक क्लस्टर बिना रुकावट के विकसित किए जा सकें।

पार्कों में कैसी सुविधाएं होंगी

BHAVYA योजना के तहत बनने वाले पार्क प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर आधारित होंगे। इसका मतलब है कि उद्योगों को पहले से तैयार सुविधाएं मिलेंगी, जिससे वे तेजी से उत्पादन शुरू कर सकें। इन पार्कों में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स (CETPs), ट्रीटमेंट, स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटीज (TSDFs), जल आपूर्ति प्रणाली और लॉजिस्टिक्स ढांचा शामिल होगा।CETPs औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार के लिए साझा संयंत्र होते हैं, जबकि TSDFs खतरनाक कचरे के उपचार, भंडारण और निपटान के लिए उपयोग किए जाते हैं। इससे पर्यावरणीय प्रबंधन बेहतर होने की उम्मीद है और उद्योगों पर अलग-अलग ढांचा बनाने का बोझ भी कम होगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • रसायन क्षेत्र में उर्वरक, पेट्रोकेमिकल्स, डाई और विशेष रसायन शामिल होते हैं।
  • चुनौती-आधारित चयन प्रक्रिया में राज्य तय मानकों पर प्रतिस्पर्धा करते हैं।
  • कंटिग्युअस भूमि का अर्थ है ऐसी जमीन जो बिना किसी गैप के एकसाथ जुड़ी हो।
  • औद्योगिक पार्कों में आम तौर पर बिजली, पानी, सड़क और कचरा प्रबंधन जैसी साझा सुविधाएं होती हैं।

कुल मिलाकर, BHAVYA Rasayan Scheme रसायन उद्योग के लिए एक समेकित औद्योगिक ढांचा तैयार करने की दिशा में अहम कदम है। इससे बड़े पैमाने पर निवेश, बेहतर लॉजिस्टिक्स और पर्यावरणीय प्रबंधन को एक साथ आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

Originally written on July 24, 2026 and last modified on July 24, 2026.

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