निजी एफएम रेडियो में स्थानीय भाषा की अनिवार्यता क्यों अहम है
देश में निजी एफएम रेडियो अब सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, शहर-विशेष सूचना और जनसंपर्क का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। 24 जुलाई 2026 तक भारत में 386 निजी एफएम चैनल सक्रिय थे। इन चैनलों के लिए नीति के तहत यह जरूरी है कि दैनिक प्रसारण का कम से कम 20% हिस्सा उस शहर की स्थानीय भाषा में हो।
स्थानीय भाषा नियम का उद्देश्य
निजी एफएम रेडियो नीति का यह प्रावधान शहरों की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को प्रसारण से जोड़ता है। स्थानीय भाषा में कार्यक्रमों के जरिए क्षेत्रीय परंपराओं, लोककथाओं, लोकसंगीत और समुदाय-आधारित विषयों को जगह मिलती है। इससे रेडियो केवल राष्ट्रीय खबरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि श्रोताओं के रोजमर्रा के जीवन से भी जुड़ता है।यह नियम खास तौर पर उन शहरों में उपयोगी है जहां श्रोता अपनी बोली, स्थानीय मुहावरों और सांस्कृतिक संदर्भों से जुड़ा कंटेंट पसंद करते हैं। इसी कारण एफएम रेडियो को स्थानीय मनोरंजन और सामुदायिक संवाद का प्रभावी माध्यम माना जाता है।
निजी एफएम रेडियो कैसे काम करता है
भारत में निजी एफएम सेवाएं केंद्र सरकार द्वारा जारी लाइसेंस के आधार पर चलती हैं। एफएम का अर्थ फ्रीक्वेंसी मॉड्यूलेशन है, जिसमें ध्वनि को कैरियर वेव की आवृत्ति बदलकर प्रसारित किया जाता है। यही तकनीक रेडियो प्रसारण को साफ और स्थानीय स्तर पर प्रभावी बनाती है।निजी एफएम चैनलों का उपयोग स्थानीय मनोरंजन, समाचार-आधारित कार्यक्रमों और समुदाय-केंद्रित सामग्री के लिए किया जाता है। सरकार इन प्रसारणों पर नीति शर्तों, लाइसेंसिंग और तकनीकी उपयोग के जरिए निगरानी रखती है।
फेज-III नीति और विस्तार की दिशा
निजी एफएम रेडियो की फेज-III नीति 2015 में लागू हुई थी। इस चरण के तहत निजी प्रसारकों को प्रसार भारती के ट्रांसमिशन टावरों और साइटों का उपयोग करने की अनुमति दी गई, ताकि एफएम सेवाओं का विस्तार तेजी से हो सके। प्रसार भारती भारत का वैधानिक सार्वजनिक सेवा प्रसारक है, जिसमें आकाशवाणी और दूरदर्शन शामिल हैं।9 और 10 जुलाई 2025 को 234 नए शहरों में 730 एफएम चैनलों के लिए ई-नीलामी हुई थी। इस प्रक्रिया में 18 सफल बोलीदाता सामने आए, जिनमें नौ नए प्रवेशकर्ता भी शामिल थे। इससे संकेत मिलता है कि निजी एफएम क्षेत्र में विस्तार की संभावनाएं अभी भी बनी हुई हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एफएम का पूरा नाम Frequency Modulation है, यानी आवृत्ति में बदलाव के जरिए ध्वनि प्रसारण।
- प्रसार भारती की स्थापना प्रसार भारती अधिनियम, 1990 के तहत हुई थी।
- राज्यसभा संसद का ऊपरी सदन है और केंद्रीय मंत्री लिखित उत्तर इसी सदन में दे सकते हैं।
- निजी एफएम रेडियो की फेज-III नीति का संबंध देश में एफएम सेवाओं के व्यापक विस्तार से है।
कुल मिलाकर, निजी एफएम रेडियो पर 20% स्थानीय भाषा की शर्त यह दिखाती है कि प्रसारण नीति केवल तकनीकी विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि वह स्थानीय पहचान, जनसंपर्क और सांस्कृतिक विविधता को भी साथ लेकर चलती है।